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Wednesday, 28 October 2026
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14 वर्षीय बच्चे को PIMS में मिली नई जिंदगी

उदयपुर, 20 मार्च: पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS), उमरड़ा के कार्डियोलॉजी विभाग ने एक 14 वर्षीय बच्चे का सफलतापूर्वक इलाज किया है, जो हृदय रोग से ग्रसित था। इस उपचार में Balloon Mitral Valvotomy (BMV) तकनीक का उपयोग किया गया।

PIMS के अध्यक्ष आशीष अग्रवाल ने जानकारी दी कि यह उपचार भामाशाह योजना के तहत निःशुल्क किया गया।

कार्डियोलॉजी के प्रमुख, डॉ. महेश जैन ने बताया कि बच्चे को रूमेटिक हार्ट डिजीज का निदान हुआ था, जिसमें उसकी माइट्रल वाल्व गंभीर रूप से संकुचित थी। विस्तृत जांच के बाद, टीम ने पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी के बजाय उन्नत Balloon Mitral Valvotomy (BMV) तकनीक का चयन किया, क्योंकि इसके साथ जुड़े जोखिम और जटिलताओं को ध्यान में रखा गया।

यह न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया डॉ. महेश जैन और उनकी टीम द्वारा सफलतापूर्वक की गई। कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. विपिन सिसोदिया और CTVS सर्जन डॉ. विवेक रावत ने उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रक्रिया के बाद, बच्चे की स्थिति में सुधार हुआ, रक्त प्रवाह बेहतर हुआ और पारंपरिक सर्जरी की तुलना में जल्दी रिकवरी हुई।

BMV तकनीक क्या है?
डॉ. जैन ने बताया कि Balloon Mitral Valvotomy एक न्यूनतम आक्रामक प्रक्रिया है, जिसमें एक विशेष बलून कैथेटर का उपयोग करके संकुचित माइट्रल वाल्व को धीरे-धीरे चौड़ा किया जाता है, जिससे सामान्य रक्त प्रवाह संभव होता है। यह तकनीक विशेष रूप से रूमेटिक हार्ट डिजीज से ग्रसित मरीजों के लिए प्रभावी है और ओपन-हार्ट सर्जरी की तुलना में कम जोखिम और तेजी से रिकवरी प्रदान करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि BMV तकनीक भविष्य में कई मरीजों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो ओपन-हार्ट सर्जरी से बचना चाहते हैं या जिनके लिए यह उपयुक्त नहीं है।

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