Himachal Pradesh में मानसून एक बार फिर कहर बरपा रहा है. शुक्रवार रात हुई तेज बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. खासकर शिमला के समीप सुन्नी क्षेत्र में सतलुज नदी के उफान के चलते बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं. यहां आईटीआई, फॉरेस्ट रेस्ट हाउस और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में पानी घुस गया है. सुन्नी पुल पर प्रशासन ने आवाजाही पूरी तरह से बंद कर दी है और लोगों को नदी से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी गई है. कांगड़ा जिले में पौंग डैम से छोड़े गए पानी ने हालात को और गंभीर बना दिया है. वहीं, मंड भोग्रवां गांव में अचानक व्यास नदी का जलस्तर बढ़ने से एक बहुमंजिला मकान का हिस्सा नदी में समा गया, हालांकि समय रहते लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया.

मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने Himachal Pradesh में 19 अगस्त तक भारी बारिश के लिए येलो अलर्ट जारी किया है. ऊना, चंबा, कांगड़ा, शिमला और सिरमौर जिलों में Saturday को भारी बारिश की संभावना जताई गई है, जबकि 22 अगस्त तक मौसम खराब बना रह सकता है. बीती रात बिलासपुर के नैना देवी में सबसे अधिक 160 मिमी बारिश दर्ज हुई, कांगड़ा के पालमपुर में 101, मंडी में 62 और कोठी में 48 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई.
सड़कें, बिजली और जलापूर्ति पर असर
भारी वर्षा के चलते भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे प्रदेश में दो नेशनल हाइवे और 374 सड़कें बाधित हैं. अकेले मंडी जिले में 203 सड़कें बंद हैं. कुल्लू में 79, कांगड़ा में 25, चंबा में 20 और सिरमौर में 17 सड़कें प्रभावित हुई हैं. साथ ही, कुल्लू में एनएच-305 और किन्नौर में एनएच-5 भी बंद हो गए हैं. कई जगह चंडीगढ़-मनाली हाइवे पर भी यातायात बाधित हुआ है.
बिजली और पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. प्रदेश में 524 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं और 145 पेयजल योजनाएं ठप हो गई हैं, जिसमें सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी, कांगड़ा, चंबा और हमीरपुर जिले हैं.
भारी नुकसान, 2,144 करोड़ से ज्यादा का नुकसान
आपातकालीन परिचालन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस मानसून सीजन में अब तक 257 लोगों की मौत हो चुकी है, 37 लोग लापता हैं और 331 लोग घायल हुए हैं. राज्य में अब तक 2,367 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 563 पूरी तरह ढह गए हैं. कुल 359 दुकानें और 2,157 पशुशालाएं भी नष्ट हो चुकी हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 2,144 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान लोक निर्माण विभाग (1,188 करोड़ रुपये) और जलशक्ति विभाग (697 करोड़ रुपये) को हुआ है.
अब तक प्रदेश में 61 भूस्खलन, 72 बाढ़ और 34 बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं. प्रशासन लगातार लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य जारी है.