शिमला, 18 अगस्त (Udaipur Kiran). Himachal Pradesh में मॉनसून की सक्रियता के चलते फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं है. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने अगले एक हफ्ते तक प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी दी है और 24 अगस्त तक येलो अलर्ट जारी किया है. 18 से 20 अगस्त के दौरान प्रदेश के कुछ हिस्सों में गरज-चमक और अंधड़ के साथ भारी वर्षा की संभावना है, वहीं 21 अगस्त को अंधड़ चलने का अनुमान है. 22 से 24 अगस्त तक एक बार फिर भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है.

लगातार हो रही वर्षा के कारण प्रदेश में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. Monday को सिरमौर के पांवटा साहिब, कुल्लू के आनी और मंडी सदर उपमंडल में सभी शिक्षण संस्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया. बीती रात सिरमौर के धौलाकुआं में सर्वाधिक 113 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि जोत और मेलरान में 70-70 मिमी, पालमपुर में 58 मिमी और जतौन वेरेज में 49 मिमी वर्षा हुई.
तीन नेशनल हाईवे और 397 सड़कें अवरुद्ध
भारी बारिश और भूस्खलन से प्रदेश में यातायात व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है. राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार Monday सुबह तक प्रदेश में तीन नेशनल हाईवे और 397 सड़कें बंद रहीं. इनमें अकेले मंडी जिले में 193 सड़कें अवरुद्ध हैं. कुल्लू में 85, चंबा में 29, कांगड़ा में 27, सिरमौर में 22 और शिमला में 21 सड़कें बंद हैं. कुल्लू में एनएच-305, किन्नौर में एनएच-5 और मंडी में एनएच-21 पर यातायात पूरी तरह बाधित है.
शिमला–मंडी सड़क भी सतलुज नदी की तेज धारा के कटाव के चलते गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई है. आरडी 51/555 पर सड़क की चौड़ाई घटकर मात्र डेढ़ मीटर रह गई है, जिससे वाहन चलाना असुरक्षित हो गया है. यह मार्ग 51/000 से 52/000 तक सभी वाहनों के लिए अगले आदेश तक बंद रहेगा. वैकल्पिक थाली ब्रिज मार्ग भी क्षतिग्रस्त हो चुका है, जिससे इस समय कोई वैकल्पिक सड़क उपलब्ध नहीं है.
बिजली और पानी की आपूर्ति पर असर
प्रदेश में बारिश से बिजली और पानी की सप्लाई भी बुरी तरह प्रभावित हुई है. राज्यभर में 883 ट्रांसफार्मर बंद हैं, जिनमें से 543 कुल्लू और 303 मंडी जिले में हैं. इसके अलावा 122 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं, जिनमें मंडी में 44 और कांगड़ा में 41 शामिल हैं.
मानसून में अब तक 263 लोगों की मौत
अब तक इस मानसून सीजन में प्रदेश में 263 लोगों की मौत हो चुकी है, 37 लोग लापता हैं और 332 लोग घायल हुए हैं. मंडी में सबसे ज्यादा 47, कांगड़ा में 41, चंबा में 31, शिमला में 26, किन्नौर में 24 और कुल्लू में 22 लोगों की मौत हुई है. इस दौरान 2456 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें 581 पूरी तरह ढह गए. 361 दुकानें और 2201 पशुशालाएं भी नष्ट हो चुकी हैं. अकेले मंडी में 1296 मकान, 287 दुकानें और 1219 पशुशालाएं तबाह हुई हैं.
भूस्खलन और बारिश से बड़ा नुकसान
भूस्खलन और बारिश से अब तक 1626 पशुओं और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत हो चुकी है. सरकारी आकलन के मुताबिक प्रदेश को अब तक 2173 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है, जिसमें लोक निर्माण विभाग को 1216 करोड़ और जलशक्ति विभाग को 697 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
इस बीच कुल्लू जिले में औट–लारजी–सैंज सड़क मार्ग पागल नाले के पास भारी भूस्खलन से बाधित है, जिससे 15 पंचायतों का संपर्क कट गया है. वहीं, बिलासपुर जिले के नैना देवी में बारिश के चलते पुराना बस अड्डा चौक पर एक इमारत गिर गई, जिससे लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.