हत्या के 43 साल पुराने मामले में उम्रकैद काट रहे तीन अभियुक्त बरी, सजा रद्द

इलाहाबाद हाईकाेर्ट

–सोरांव थाने में दर्ज मामले में 1987 में सुनाई गई सजा को दी गई थी चुनौती

Prayagraj, 30 दिसम्बर (Udaipur Kiran) . इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हत्या के 43 साल पुराने मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे तीन अभियुक्तों को बरी कर दिया है. न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा कि यह ब्लाइंड मर्डर था.

चश्मदीद गवाहों के बयान और चिकित्सा साक्ष्य में विरोधाभास पाते हुए कोर्ट ने कहा, अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर सका. सोरांव थाने में दर्ज इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, इलाहाबाद ने सजा सुनाई थी. अभियोजन कथानक के अनुसार शिकायतकर्ता राम किशोर ने आठ जुलाई 1982 को तहरीर देकर बताया था कि भाई राम दुलारे गांव भदरी में नहर किनारे बैंगन की फसल की रखवाली कर रहा था. रात लगभग एक बजे उसे चाचा पंचम ने बताया कि रेलवे स्टेशन के पास कुछ लोग रामदुलारे को पीट रहे हैं.

जानकारी पाकर वह चाचा तथा नानकू के साथ मौके पर पहुंचा. वहां उदय नारायण, दयाराम, जैराम, रामअवध, लाला राम, महरानी दीन, हरीश चंद्र, कल्लू, हरि, अमृत लाल और राम सुंदर प्रधान उर्फ भोला उसके भाई को लाठी से मार रहे थे. अमृत लाल ने उसके भाई को नीचे गिरा दिया और उदल उर्फ उदय नारायण ने उसकी गुप्तांग (गुदा) में लाठी डाल दी. उसका भाई वहीं पर मर गया. इसके बाद अभियुक्त धमकाते हुए भाग निकले.

पुलिस ने कुल 11 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया. वर्ष 1987 में उन्हें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने सजा सुनाई. इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दायर की गई. कोर्ट ने कहा कि यदि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो अमृत लाल, हरीश चंद्र और कल्लू को जेल से रिहा किया जाए.

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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे

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