
उदयपुर, 13 मई: पैसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) के डॉक्टरों ने एक नवजात शिशु की गंभीर जन्मजात स्थिति का सफलतापूर्वक उपचार किया, जिससे बच्चे को नई जिंदगी मिली.
बाल सर्जन डॉ. अतुल मिश्रा के अनुसार, यह बच्चा PIMS अस्पताल में पैदा हुआ और इसे डुओडेनल एट्रेसिया (Duodenal Atresia) का निदान किया गया, जो आंतों के एक हिस्से के सही तरीके से विकसित न होने की गंभीर स्थिति है.
नवजात को एक और दुर्लभ स्थिति, साइटस इनवर्सस (Situs Inversus) का भी सामना करना पड़ा, जिसमें आंतरिक अंग शरीर के अंदर विपरीत दिशा में स्थित होते हैं. डॉक्टरों ने कहा कि जबकि साइटस इनवर्सस अकेले में बड़ी जटिलताएँ नहीं पैदा करता, लेकिन डुओडेनल एट्रेसिया के साथ इसका होना अत्यंत दुर्लभ है और सर्जिकल जटिलता को काफी बढ़ा देता है.
डॉ. मिश्रा ने बताया कि डुओडेनल एट्रेसिया आमतौर पर हर 5,000 से 10,000 नवजातों में से एक में देखा जाता है, लेकिन दोनों स्थितियों का एक साथ होना विश्वभर में केवल बहुत कम मामलों में पाया जाता है.
यह सर्जरी लगभग तीन घंटे तक चली, जिसमें डॉक्टरों ने सफलतापूर्वक आंतों को जोड़ दिया. अंगों की विपरीत स्थिति के कारण यह प्रक्रिया तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी. चिकित्सा टीम को एक और चुनौती का सामना करना पड़ा क्योंकि बच्चा प्रीमैच्योर था और उसका वजन केवल 1.7 किलोग्राम था.
कई दिनों की पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल और निगरानी के बाद, बच्चा सफलतापूर्वक ठीक हो गया और अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया.
इस सर्जरी में कई विशेषज्ञों का समर्थन शामिल था, जिसमें एनेस्थेसिया और पीडियाट्रिक्स विभाग के डॉक्टरों के साथ-साथ नर्सिंग और तकनीकी स्टाफ के सदस्य शामिल थे.
चेयरमैन आशीष अग्रवाल ने कहा कि पूरे उपचार को जननी सुरक्षा योजना के तहत मुफ्त में प्रदान किया गया. उन्होंने यह भी कहा कि PIMS अस्पताल उदयपुर क्षेत्र में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयासरत है.