भारतीय नौसेना को तीन स्वदेशी युद्धपोतों से मिलेगी नई ताकत

कोलकाता, जून 19: Indian नौसेना 21 जून को तीन स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से अपनी समुद्री ताकत को बढ़ाने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर एक विशेष समारोह की अध्यक्षता करेंगे, जो नौसेना के आधुनिकीकरण प्रयासों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है.

इन तीन युद्धपोतों में गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट दूनागिरी, एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रेह, और बड़े सर्वेक्षण पोत संशोधक शामिल हैं. यह कार्यक्रम 30 मार्च को हुए एक ऐतिहासिक अवसर के बाद आयोजित किया जा रहा है, जब एक ही दिन में तीन स्वदेशी जहाजों को नौसेना में शामिल किया गया था.

दूनागिरी, पिछले INS दूनागिरी का एक आधुनिक संस्करण है, जिसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा प्रोजेक्ट 17A के तहत Indian नौसेना को सौंपा गया. यह फ्रिगेट उन्नत प्रणालियों से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली, बाराक-8 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, और स्वदेशी टॉरपीडो शामिल हैं, जो इसे विभिन्न समुद्री खतरों का मुकाबला करने में सक्षम बनाते हैं.

अग्रेह, 2019 में शुरू किए गए एंटी-सबमरीन वारफेयर प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जिसे दुश्मन की पनडुब्बियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए डिज़ाइन किया गया है. यह एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर्स और हल्के टॉरपीडो से लैस है, जिससे यह उच्च गति पर कार्य करने और महत्वपूर्ण दूरी तय करने में सक्षम है.

संशोधक हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षणों और सुरक्षित नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें इसके निर्माण में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. इसकी लंबाई 110 मीटर और वजन लगभग 3,800 टन है, जो देश की समुद्री सुरक्षा और नौवहन सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देगा.

इन युद्धपोतों का समावेश न केवल भारत की बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं को दर्शाता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में स्वदेशी शिपबिल्डिंग के महत्व को भी रेखांकित करता है.

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