5356 कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिल रही ओल्ड पेंशन : मुख्यमंत्री

धर्मशाला, 04 दिसंबर (Udaipur Kiran) । मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार ने एक लाख 36 हजार के करीब सरकारी कर्मियों को 2003 से बन्द ओल्ड पेंशन को दोबारा देने का फैसला किया। केंद्र से इसके लिए 1600 करोड़ अतिरिक्त मिलते थे, वह राशि बन्द कर दी गई है। 5356 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने पर ओल्ड पेंशन स्कीम प्रदान की जा रही है। सरकार की ओर से अब सभी पात्र कर्मचारियों को सेवानिवृत होने पर ओपीएस प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सदन में दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओपीएस से एनपीएस में जाने का शेयर 50-50 फीसदी जाता है, जोकि 10 हजार के करीब ईपीएफ फंड केंद्र सरकार में जमा है। इसमें ओपीएस मिलने पर वह राज्य सरकार के फंड में जमा होने चाहिए, जबकि वह अभी शेयर मार्केट में लगाया जा रहा है। पूर्व सरकार के समय के एरियर को भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे एक लाख 17 हजार को लाभ दिया जा रहा है। अपना अंशदान जमा करवाने पर ही ओपीएस में शिफ्ट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुल 11 हजार ने ओपीएस को शिफ्ट किया है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि बार-बार प्रश्न पूछने के बाद उत्तर आज मिल पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल उठाया कि वर्ष 2022 से 31-10-2025 तक कितने कर्मचारी ओपीएस में शामिल हुए हैं। इसमें 26 हजार 324 संख्या बताई जा रही है जबकि सिर्फ 5356 कर्मचारी ही एनपीएस से ओपीएस में भेजे गए हैं, तो इसमें वित्तीय स्थिति घटी या बढ़ी वो भी बता दीजियेगा। इसमें कर्मियों को कितना लाभ हुआ है। जय राम ने कहा कि चुनावों में उनकी गारंटी थी, तो ये राजनीतिक रूप से प्रेरित था। इस अवधि में आठ हजार से अधिक पदों को सृजित किया गया। कितने पदों पर नियुक्ति की गई, इसपर कोई जबाव ही नहीं दिया जा रहा है।
वहीं विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि ओपीएस लागू करके कर्मचारियों को बहुत बड़ा आर्थिक लाभ दिया है। जबकि जो आंकड़ा आया है उसमें 26 हजार 324 सेवानिवृत्त हुए, उनमें मात्र 5356 ने ही ओपीएस ली, जबकि 21 हजार से अधिक ने एनपीएस ही ली है, इसका क्या कारण है।
प्रदेश में 742 करोड़ की सीवरेज योजनाओं पर चल रहा काम : उपमुख्यमंत्री
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश में 742 करोड़ की सीवरेज योजनाओं पर काम चल रहा है। इसमें राज्य सरकार की ओर से ही पैसा दिया जाएगा। 56 करोड़ की स्कीम शाहपुर के लिए स्वीकृत कर ली है, जिसमें 20 करोड़ जारी किया है। इसमें सात करोड़ खर्च किए गए है, जबकि 80 लाख अभी आया है।
उपमुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधायक केवल सिंह पठानिया द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में सदन में दी। डिप्टी सीएम ने कहा कि पाईप पहले खरीदने के विषय में 15 करोड़ से अधिक की स्कीमों में ठेकेदार को पाइपें खरीदने की अनुमति दी जाती है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार के स्कीम मिलने पर अपने तर्ज पर कार्य किया जाता है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि स्कीम को आगे बढ़ाने को काम होगा। पीजीआई सेटेलाइट सेंटर ऊना में बन रहा है, इसमें चार करोड़ 55 लाख राज्य सरकार की ओर से दिया जाना है।
उन्होंने कहा कि पीजीआई से भी निवेदन आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जल्द ही राशि जारी किए जाने की बात रखी। डिप्टी सीएम ने कहा सीवरेज के लिए राज्य सरकार की ओर से ही पैसा दिया जाता है। 800 करोड़ की स्कीमों को स्टेट हेड से पैसे नहीं मिल पाएंगे। ऐसे में केंद्र से व नाबार्ड से बजट के लिए कार्य करना होगा। अग्निहोत्री ने कहा कि एमएलए प्राथमिकता के तहत कार्य करवाने के लिए काम करना चाहिए। जिससे कार्य को पूरा करने में दिक्कत हो रही है। स्कीम को सेंटर में भेजने के लिए प्रपोजल मिलने पर केंद्र को भेजी जाएगी।
केवल सिंह पठानिया ने सीवरेज की स्थिति को लेकर सवाल किया है। इसमें राज्य में करोड़ों की स्कीमें रखी गई हैं। इसमें जैसे टेंडर होता है, पाइपें निकट भविष्य में सोर्स को डवलपमेंट का कार्य करने की बात रखी है।
ऊना में पीजीआई सेटेलाइट हॉस्पिटल को बनाने के लिए 403 कनाल जमीन प्रदान की गई थी। इसमें केंद्र सरकार की ओर से पौने चार सौ करोड़ का कार्य होने वाला है। इसमें सीवरेज के लिए चार करोड़ 55 लाख में से मात्र एक करोड़ ही उसके लिए जारी किया गया। जिसमें काम थोड़ा ही हो पाया है। उन्होंने तीन करोड़ 55 लाख जल्द जारी करने की मांग रखी। विधायक सतपाल सत्ती ने मुख्यमंत्री से इस विषय में जल्द ही बजट जारी करने की मांग रखी। जिससे 400 बेड को शुरू किया जा सकें।
चौपाल के विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि उनके क्षेत्र में सीवरेज के नेरवा व चौपाल में काम रुके हुए हैं। अरबन डवलपमेंट के लिए उक्त दोनों की प्रपोजल भेजने की भी मांग रखी है।
डॉ जनक राज ने कहा कि सीवरेज के लिए सड़क को खोद दिया गया है, जिसमें भरमौर, किलाड़, पांगी व मेहला में कार्य में देरी हो रही है।
(Udaipur Kiran) / सतेंद्र धलारिया



