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Sunday, 1 November 2026
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वायु प्रदूषण पर केंद्र सरकार का बयान वैज्ञानिक तथ्यों से उलट : जयराम रमेश

जयराम रमेश

नई दिल्ली, 15 दिसंबर (Udaipur Kiran) । कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने राज्यसभा में वायु प्रदूषण और उससे होने वाली मौतों और बीमारियों को लेकर केंद्र सरकार के बयान पर एक पत्र जारी कर चौंकाने वाला और असंवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण सरकार के दावे का पूरी तरह खंडन करते हैं। इसी बीच राजधानी दिल्ली में सोमवार को कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 500 या उससे अधिक दर्ज किया गया।

जयराम रमेश ने कहा कि 9 दिसंबर को केंद्र सरकार ने राज्यसभा में यह दावा किया कि देश में ऐसा कोई पक्का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि मृत्यु या बीमारी का सीधा संबंध केवल वायु प्रदूषण से है। उन्होंने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि इससे पहले 29 जुलाई 2024 को भी सरकार ने इसी तरह का बयान दिया था।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अध्ययन सरकार के दावे के विपरीत हैं। उन्होंने जुलाई 2024 में द लैंसेट में प्रकाशित अध्ययन का हवाला देते हुए कहा कि भारत में कुल मौतों का 7.2 प्रतिशत वायु प्रदूषण से जुड़ा है और केवल 10 शहरों में ही हर साल लगभग 34 हजार मौतें इससे संबंधित हैं।

उन्होंने मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज़ के अध्ययन का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन जिलों में वायु प्रदूषण नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स से अधिक है, वहां वयस्कों में समय से पहले मृत्यु का खतरा 13 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जबकि बच्चों में मृत्यु दर में लगभग दोगुनी वृद्धि देखी गई है।

जयराम रमेश ने द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ और वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में हर साल 15 से 20 लाख मौतें वायु प्रदूषण से जुड़ी होती हैं और यह समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।

उन्होंने कहा कि 2009 में तय किए गए वायु गुणवत्ता मानकों को तत्काल अपडेट कर सख्ती से लागू करने की जरूरत है। साथ ही, 2017 में शुरू किए गए नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम और ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को केवल प्रतिक्रियात्मक बताते हुए इनमें बुनियादी सुधार की मांग की।

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(Udaipur Kiran) / प्रशांत शेखर

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