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Thursday, 29 October 2026
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34 दिन की उम्र में हुआ बाल विवाह, 19 साल बाद मिली मुक्ति

jodhpur

जोधपुर, 24 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । क्रिसमस डे से पहले एक बालिका वधू को बाल विवाह की जंजीरों से आजादी का तोहफा मिल गया। साल 2005 में महज 34 दिन की मासूम उम्र में बाल विवाह की शिकार बालिका वधु सोनिया ने करीब 19 साल तक दंश झेला। अब सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी एवं पुनर्वास मनोवैज्ञानिक डॉ. कृति भारती के संबल और प्रयासों से सोनिया का बाल विवाह निरस्त हो गया। जोधपुर पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 के न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने सोनिया के बाल विवाह निरस्त का फैसला सुनाया। जिसके साथ ही सोनिया व परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक गए। सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति ने अब तक 53 जोड़ो के बाल विवाह निरस्त करवा कर अनूठा रिकॉर्ड बनाया है।

सोनिया का बाल विवाह जोधपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में वर्ष 2005 में हुआ था, जब वह केवल 34 दिन की ही थीं। साल 2022 में गौना होने के बाद ससुराल भेजा गया, लेकिन कुछ अभद्रता के कारण मजबूरन पिता के घर लौटीं। इस पीड़ा के बीच सारथी ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी और चाइल्ड एंड वूमन राइट्स एडवोकेट डॉ. कृति भारती की बाल विवाह निरस्त की मुहिम के बारे में पता चला। डॉ. कृति के संबल से सोनिया ने हिम्मत जुटाई और पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 में बाल विवाह निरस्तीकरण का वाद दायर किया। डॉ. कृति भारती ने दोनों पक्षों की काउंसलिंग की। जिसमें दोनों पक्षों की बाल विवाह निरस्त करने पर सहमति बन गई। वर पक्ष के अधिवक्ता प्रकाश विश्नोई का भी सकारात्मक सहयोग रहा। डॉ. कृति ने न्यायालय में पैरवी करते हुए बाल विवाह के तथ्यों और दस्तावेजों को पेश किया। जिस पर पारिवारिक न्यायालय संख्या 1 के न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने सुनवाई कर बाल विवाह निरस्त का फैसला सुनाया। सोनिया को केवल 5 माह की न्यायिक प्रक्रिया में ही बाल विवाह से मुक्ति मिली।

कोर्ट का सशक्त संदेश- बाल विवाह एक जघन्य अपराध

फैसला सुनाते हुए पारिवारिक न्यायालय संख्या-1 के न्यायाधीश सतीश चंद्र गोदारा ने बाल विवाह की कुप्रथा पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य को छीनने वाला जघन्य कृत्य है। ऐसी कुरीतियों को जड़ से खत्म करने के लिए सभी को आगे आना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सारथी ट्रस्ट की डॉ. कृति भारती ने ही देश का पहला बाल विवाह निरस्त करवाया था। अब तक उन्होंने 53 जोड़ों के बाल विवाह निरस्त करवा दिए हैं तथा करीब 2200 से अधिक बाल विवाह रोके हैं।

(Udaipur Kiran) / सतीश

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