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Wednesday, 28 October 2026
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साइबर-हवाला गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार

साइबर-हवाला मामले में पकड़े गए आरोपितों की फोटो

नई दिल्ली, 15 दिसंबर (Udaipur Kiran) । दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने एक बड़े और संगठित साइबर-हवाला गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई के दौरान ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले नेटवर्क के एक अहम आरोपित को गिरफ्तार किया गया। वहीं एनडीपीएस एक्ट के एक वांछित आरोपित को भी दबोचा गया।

क्राइम ब्रांच के पुलिस उपायुक्त आदित्य गौतम ने सोमवार को बताया कि यह मामला एक 61 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक की शिकायत से सामने आया था, जिन्हें फर्जी ऑनलाइन निवेश स्कीम के जरिए 33 लाख 10 हजार रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था। इस संबंध में ई-एफआईआर दर्ज कर साइबर सेल ने गहन तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की।

पुलिस उपायुक्त ने बताया कि जांच में सामने आया कि ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, जो फर्जी कंपनियों के नाम पर खोले गए थे। इनमें ‘बेलक्रेस्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक कथित कंपनी प्रमुख रूप से सामने आई। जिसके खाते में करीब 10 लाख 68 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे। बैंकिंग ट्रेल की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि रकम को परत-दर-परत घुमाकर हवाला और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए बाहर भेजा गया। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि उक्त मामले में पहले ही दिल्ली से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका था। पूछताछ के दौरान उन्होंने दीपांशु नाम के आरोपित की भूमिका उजागर की, जो इस साइबर-हवाला नेटवर्क का अहम ऑपरेटर बताया गया। इसके बाद इंस्पेक्टर अशोक के नेतृत्व में गठित टीम ने तकनीकी निगरानी के आधार पर दीपांशु की तलाश शुरू की। इस बीच पता चला कि वह उप्र के लखनऊ में छिपा हुआ है। लगातार पीछा करने के बाद पुलिस ने उसे मोहन लालगंज इलाके से आधी रात को गिरफ्तार किया। उसके पास से दो मोबाइल फोन, तीन चेकबुक और दो डेबिट कार्ड बरामद किए गए। पूछताछ में आरोपित ने खुलासा किया कि वह अपने आकाओं के निर्देश पर डमी डायरेक्टरों के जरिए शेल कंपनियां बनवाता था और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से खाते खुलवाता था। ठगी की रकम को सीएसपी24सेवन टेक्नोलॉजीज और लेविन फिनटेक जैसी शेल कंपनियों के माध्यम से हवाला और क्रिप्टो चैनलों में भेजा जाता था। इसके अलावा आरोपित ने यह भी कबूल किया कि सह-आरोपित की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद उसने सबूत मिटाने के इरादे से चेकबुक और सिम कार्ड नष्ट कर दिए थे। हालांकि उसका मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

एनडीपीएस एक्ट का वांछित आरोपी भी पकड़ा गया

पुलिस उपायुक्त के अनुसार इसी ऑपरेशन के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में वांछित आरोपित ऋषभ सिंह भी मोहनलालगंज इलाके में छिपा हुआ है। टीम ने 24 घंटे तक लगातार निगरानी और छापेमारी के बाद दीपांशु के साथ-साथ ऋषभ सिंह को भी गिरफ्तार किया। प्राथमिक जांच में सामने आया कि ऋषभ सिंह ने ही लखनऊ में वह ठिकाना दिलवाया था, जहां दीपांशु छिपकर रह रहा था। यह व्यवस्था जानबूझकर पुलिस से बचाने और गिरफ्तारी से बचने के मकसद से की गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क, मास्टरमाइंड, हवाला ऑपरेटरों, क्रिप्टो वॉलेट्स और संभावित अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की जांच में जुटी है।

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(Udaipur Kiran) / कुमार अश्वनी

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