उदयपुर विश्वकर्मा जांगिड विकास संस्था के चुनाव पर असंवैधानिकता का आरोप, रोक की मांग तेज

उदयपुर विश्वकर्मा जांगिड विकास संस्था में चुनाव प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। संस्था के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि 17 अगस्त को करवाए जा रहे चुनाव संस्था के संविधान के खिलाफ हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। उनका कहना है कि संविधान में दर्ज प्रक्रियाओं की अनदेखी कर यह चुनाव कराए जा रहे हैं, जबकि मामला न्यायालय में विचाराधीन भी है।
संस्थागत नियमों की अनदेखी और सदस्यता विवाद
पूर्व सचिव बलवंत शर्मा, अध्यक्ष जगदीश जांगिड, पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र कुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि संस्था के संविधान के अनुरूप हर तीसरे वर्ष कार्यकारिणी का चुनाव होता रहा है। कोविड काल में चुनाव स्थगित हुए थे और इस दौरान कार्यकारिणी ने ऑडिट सहित सभी कानूनी कार्य पूरे किए। इसी बीच कुछ सदस्यों ने तदर्थ समिति बनाकर अपनी ओर से चुनाव की घोषणा कर दी, जबकि यह संविधान के खिलाफ था।
संस्था पदाधिकारियों के अनुसार, तदर्थ समिति द्वारा ₹1100 शुल्क लेकर अवैध रूप से 600 से अधिक सदस्य बना दिए गए, जिससे संस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे। इस पूरे विवाद में मामला कोर्ट तक पहुंचा और कई बार स्थगन आदेश, अपील और जिला प्रशासन की दखल रही।
सेशन कोर्ट ने दोनों पक्षों को सलाह दी कि कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त होने पर आपसी सहमति से चुनाव करवाएं, लेकिन कथित तदर्थ समिति ने असंवैधानिक रूप से 17 अगस्त को चुनाव की घोषणा कर दी है। संस्था पदाधिकारियों का कहना है कि न्यायालय और संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चुनाव कराए जाने चाहिए, न कि किसी तदर्थ समिति द्वारा।
संस्था पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संस्था के संविधान में तदर्थ समिति द्वारा चुनाव करवाने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः ऐसे असंवैधानिक चुनाव को तत्काल निरस्त किया जाए और न्यायालय के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।



