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Sunday, 1 November 2026
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मप्र के बैतूल में मिला दुर्लभ प्रजाति का उल्लू, वन विभाग की टीम ने किया रेस्क्यू

बैतूल में मिला दुर्लभ प्रजाति का उल्लू
बैतूल में मिला दुर्लभ प्रजाति का उल्लू

बैतूल, 29 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के ग्रीन सिटी क्षेत्र में सोमवार को वन विभाग की टीम ने एक दुर्लभ प्रजाति के उल्लू को घायल अवस्था में रेस्क्यू किया है। वन विभाग ने उल्लू को वन्य जीव चिकित्सक को दिखाने के बाद कालापाठा स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में निगरानी में रखा है।

जानकारी के अनुसार सोमवार को यह उल्लू एक गार्डन में घायल हालत में पड़ा मिला था। रहवासी ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही फॉरेस्ट गार्ड तपन उबनारे की टीम मौके पर पहुंची। वन विभाग के अनुसार, उल्लू उड़ते समय संतुलन बिगड़ने से नीचे गिर गया था और पेड़ के नीचे बैठा मिला। स्थानीय लोगों ने उसे सुरक्षित रखा, जिसके बाद वन अमले ने रेस्क्यू कर उसे पशु चिकित्सक को दिखाया।

पशु चिकित्सक डॉ. मृदुला सिन्हा ने बताया कि उल्लू की आंख में हल्की चोट पाई गई है। उन्होंने कहा कि यह लगभग 500 ग्राम वजन का कम उम्र का उल्लू है। संभव है कि अत्यधिक ठंड के कारण कमजोरी आई हो और उड़ते समय संतुलन बिगड़ गया हो। चोट गंभीर नहीं है, दवाइयां दी गई हैं और कुछ दिनों में यह पूरी तरह ठीक हो जाएगा।

डॉ. सिन्हा ने बताया कि जैसे इंसानों में ठंड और गर्मी से स्ट्रेस होता है, वैसे ही पक्षियों में भी कोल्ड या हीट स्ट्रेस की स्थिति बनती है। फिलहाल कालापाठा स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में उसे निगरानी में रखा है। अगले चार से पांच दिनों तक विशेष देखरेख की जाएगी। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद इसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

बताया गया है कि यह उल्लू ब्राउन हॉक-आउल या बू-बुक आउल प्रजाति का है। यह प्रजाति स्थानीय क्षेत्र में बेहद कम दिखाई देने वाली और प्रवासी मानी जाती है। यह ऑस्ट्रेलिया और न्यू गिनी में भी पाया जाने वाला सबसे छोटा और आम उल्लू है। बैतूल जैसे क्षेत्र में इसका मिलना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी खास माना जा रहा है।

प्राणी विज्ञानी प्रो. प्रमोद मिश्रा ने बताया कि ब्राउन हॉक-आउल या बू-बुक आउल एक दुर्लभ और प्रवासी प्रजाति है। उन्होंने कहा कि यह उल्लू आमतौर पर ठंडे इलाकों में बड़े पेड़ों के कोटरों में रहता है और रात्रिचर होता है। बैतूल क्षेत्र में इसका दिखना बेहद दुर्लभ घटना है। वन विभाग के अनुसार यह रेस्क्यू न केवल एक पक्षी की जान बचाने का प्रयास है, बल्कि क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी का भी संकेत देता है।

(Udaipur Kiran) तोमर

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