सार्वजनिक स्थल पर जुआ खेलना संज्ञेय अपराध : उच्च न्यायालय

-पुलिस को वगैर वारंट गिरफ्तार करने का अधिकार
प्रयागराज, 15 दिसंबर (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि सार्वजनिक स्थल पर जुआ खेलना संज्ञेय अपराध है और इसमें दर्ज केस में पुलिस बिना वारंट किसी को गिरफ्तार करने के साथ ही विवेचना कर सकती है।
न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने आगरा निवासी कामरान की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याची ने विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, आगरा के समक्ष लम्बित आपराधिक केस कार्यवाही रद्द करने के लिए धारा 528 भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता के अंतर्गत याचिका दायर की थी।
दिसंबर 2019 में याची को सिकंदरा स्थित पार्क में जुआ खेलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और धारा 13 के तहत आरोप पत्र दायर किया। ट्रायल कोर्ट ने तीन महीने के भीतर विचारण पूरा करने का भी आदेश दिया।
याची का कहना था कि धारा 13 का अपराध असंज्ञेय है, इसलिए बिना कोर्ट की अनुमति के न विवेचना की जा सकती है और न ही बिना वारंट गिरफ्तारी। पुलिस ने विवेचना शुरू करने के लिए मजिस्ट्रेट से अनुमति नहीं ली। इसलिए एफआइआर दर्ज होने के तुरंत बाद शुरू की गई पूरी कार्यवाही शून्य है।
कोर्ट ने इस तर्क को सही नहीं माना। कहा कि धारा 3 और 4 के लिए अलग-अलग प्रक्रियाओं की आवश्यकता हो सकती है। सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने वाले व्यक्तियों को गिरफ्तार करने के लिए धारा 13 के तहत पुलिस को दी गई विशिष्ट अधिकार इसे संज्ञेय अपराध बनाता है। इसलिए एफआइआर दर्ज करने और मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना आरोप पत्र जमा करना गलत नहीं था।
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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे



