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Thursday, 29 October 2026
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श्री जैन पी.जी. कॉलेज के एम.कॉम. 1975 बैच का स्वर्ण जयंती समारोह

50 साल बाद फिर गूंजी हंसी-ठिठोली : श्री जैन पी.जी. कॉलेज के एम.कॉम. 1975 बैच का स्वर्ण जयंती समारोह

बीकानेर, 21 दिसंबर (Udaipur Kiran) । श्री जैन पी.जी. कॉलेज, बीकानेर के एम.कॉम. (1975 बैच) के पूर्व छात्रों द्वारा रविवार को स्वर्ण जयंती समारोह-सह-स्नेह मिलन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। अपने शिक्षण काल के 50 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जीवन के लगभग 70 वसंत देख चुके ये पूर्व छात्र एक बार फिर उसी भावनात्मक जुड़ाव के साथ एक मंच पर एकत्रित हुए, जहाँ से उनके करियर और जीवन की दिशा तय हुई थी।

कार्यक्रम का माहौल अत्यंत आत्मीय और भावनात्मक रहा। वर्षों बाद मिले सहपाठियों के चेहरों पर मुस्कान, आंखों में पुरानी यादें और बातचीत में छात्र जीवन की वही हंसी-ठिठोली झलक रही थी। समारोह को उत्सव के रूप में मनाया गया, जिसमें स्मृतियों के आदान-प्रदान के साथ-साथ आपसी स्नेह और अपनत्व की भावना प्रमुख रही।

आयोजकों ने बताया कि एम.कॉम. 1975 बैच श्री जैन पी.जी. कॉलेज के लिए अत्यंत गौरवशाली रहा है। वर्ष 1975 में राजस्थान विश्वविद्यालय की वरीयता सूची (मेरिट लिस्ट) में इस बैच के कई छात्रों ने उल्लेखनीय स्थान प्राप्त कर कॉलेज का नाम रोशन किया था। इस उपलब्धि के लिए समारोह में बैच के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों केशरदेव शर्मा, प्रकाशचंद सेठिया, बाबूलाल सोनी एवं शिवप्रकाश दरगड़ का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित सभी पूर्व छात्रों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ अपने सहपाठियों को बधाई दी।

आयोजकों ने बताया कि 1975 बैच में कुल 50 विद्यार्थी थे, जिनमें से 11 विद्यार्थी आज इस दुनिया में नहीं रहे। कार्यक्रम के दौरान दिवंगत साथियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर सभी ने दो मिनट का मौन रखकर अपने मित्रों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी, जिससे वातावरण गंभीर और भावुक हो गया। समारोह का मूल उद्देश्य संगठन, सहयोग, समन्वय, स्नेह और समर्पण की भावना को मजबूत करना रहा। पूर्व छात्रों ने एक-दूसरे के अनुभव साझा किए और कॉलेज के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। कार्यक्रम के अंत में सभी ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से संपर्क बनाए रखने और सामाजिक गतिविधियों में योगदान देने का संकल्प लिया। स्वर्ण जयंती समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि समय भले ही बदल जाए, लेकिन छात्र जीवन की यादें और मित्रता की डोर कभी कमजोर नहीं पड़ती।

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(Udaipur Kiran) / राजीव

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