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Thursday, 29 October 2026
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गुरुग्राम: सतपाल सिंह चौहान की पुस्तक खुशबु-ए-एहसास का हुआ लोकार्पण

गुरुग्राम में सुरुचि साहित्य कला परिवार के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में खुशबु-ए-एहसास पुस्तक का लोकार्पण करते अतिथि।

-सुरुचि परिवार ने किया साहित्यिक आयोजन

गुरुग्राम, 29 दिसंबर (Udaipur Kiran) । सुरुचि साहित्य कला परिवार गुरुग्राम के तत्वावधान में लोकार्पण एवं समारोह एवं चर्चा गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सुरुचि परिवार के संरक्षक एवं सुप्रीम कोर्ट के पूर्व अधिवक्ता सतपाल सिंह चौहान काव्य संग्रह खुशबु-ए-एहसास का लोकार्पण किया। इस अवसर पर पूर्व कुलपति डॉ. अशोक दिवाकर, हरियाणा साहित्य अकादमी की पूर्व निदेशिका डॉ. मुक्ता मदान, सतपाल सिंह चौहान, संस्थाध्यक्ष डॉ. धनीराम अग्रवाल ने मंचासीन रहे।

प्रख्यात कवयित्री वीणा अग्रवाल द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं अतिथिगण द्वारा दीप प्रज्वलन से विधिवत कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। डॉ. अग्रवाल ने सतपाल सिंह चौहान के संघर्ष और साहित्यिक यात्रा के बारे में बताते हुए उनका विस्तृत परिचय दिया। साथ ही अतिथियों का शाब्दिक स्वागत किया। डॉ. अशोक दिवाकर ने अपने संबोधन में कहा कि मानव मूल्यों के प्रहरी सतपाल सिंह चौहान ने विषम पराथितियों में भी अपने भीतर की संवेदनशीलता को बचाये रखा। मंजू भारती ने कहा कि हम सभी के भीतर दो कस्तूरी हैं। ईश्वरीय कृपा से पिता जी के भीतर की कस्तूरी अभी भी खुशबु बिखेर रही है। कविता के अंदाज में उन्होंने कहा-ना लगा सका कोई उसके कद का अंदाजा, वो आसमां सा था सर झुकाए बैठा था। त्रिलोक कौशिक ने पुस्तक समीक्षा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जब भी रचनाकार अपने मौलिक भावना और विचारों के साथ प्रस्तुत होता है, तभी वो सतपाल सिंह चौहान बन पाता है। अपनी कविता में संकेतों में भी कवि ने किसी को बौना नहीं होने दिया। डॉ. दीपेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि कवि की रचनाओं में इंसानियत और साहित्य समान रूप से झलकता है। तेज सिंह शेखावत ने कवि को परिवार, समाज का वट वृक्ष बताते हुए शुभकामनाएं दिया।

संयम मराठा ने कहा किसी के व्यक्तित्व का अंदाजा उनकी संतानों से लगाया जा सकता है। रविंद्र यादव द्वारा रचित सतपाल जी के जीवन पर आधारित रागिनी को नरोत्तम शर्मा ने मधुर कंठ से प्रस्तुत किया। डॉ. मीमांसा ने कहा दादा जी से जो सीखा उसे जीवन में उतारने की कोशिश करती हूं। मदन साहनी ने कहा कि विविध रंग की रचनाओं का गुलदस्ता है खुशबु-ए-एहसास। इस अवसर पर राजकुमार, पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डॉ. आरपी सिंह, नरोत्तम शर्मा, लोकेश चौधरी, प्रीति देशवाल, सविता महेंद्रु, यूसुफ मंसूरी, शकुंतला मित्तल, संजीव अग्रवाल, प्रदीप वशिष्ठ, नीलम साहनी, सुरिंदर मनचंदा, डॉ. सुकर्मा, अक्षय आनंद, अनिल श्रीवास्तव सहित कई विशिष्ट महानुभावों ने गरिमामयी उपस्थिति दर्ज की।

(Udaipur Kiran)

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