हंसखाली सामूहिक दुष्कर्म मामला : तीन मुख्य दोषियों को उम्रकैद, नौ आरोपितों को अलग-अलग सजा

कोलकाता, 23 दिसंबर (Udaipur Kiran) । नदिया जिले के रानाघाट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने हंसखाली सामूहिक दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए नौ आरोपितों को सजा सुना दी है। अदालत ने तीन मुख्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सभी आरोपितों को कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सौमेन गुप्ता ने ब्रजगोपाल उर्फ सोहेल गायली, रंजीत मलिक और प्रभाकर पोद्दार को उम्रकैद की सजा सुनाई। इसके साथ ही इन तीनों को पॉक्सो कानून के तहत 20 साल के कठोर कारावास की सजा भी दी गई है।
सोहेल गायली इस मामले का मुख्य आरोपित है और वह स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेता समरेंद्र गायली का बेटा है। अदालत ने समरेंद्र गायली, दीप्त गायली और पीयूषकांति भक्त को पीड़िता के परिवार को डराने और आरोपितों को पनाह देने के आरोप में पांच साल की सजा सुनाई है।
सबूत नष्ट करने के मामले में अंग्शुमान बागची को तीन साल की सजा दी गई है। वहीं बाकी दो दोषी, सुर्जित रॉय और आकाश बारुई को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा किया गया है। इनमें से एक घटना के समय नाबालिग था, इसलिए उसे नियम के अनुसार रिहा किया गया। दूसरे आरोपित को अदालत ने एक साल तक निगरानी में रखने का आदेश दिया है। इसके बाद परिवीक्षा अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर उसकी रिहाई पर फैसला होगा।
इससे पहले सोमवार को अदालत ने सभी नौ आरोपितों को 14 साल की नाबालिग लड़की के सामूहिक दुष्कर्म का दोषी ठहराया था। यह घटना अप्रैल 2022 की है। आरोप है कि हंसखाली थाना क्षेत्र के एक गांव में जन्मदिन पार्टी के बहाने लड़की को बुलाया गया, उसे नशा कराया गया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। यह पार्टी सोहेल गायली के लिए आयोजित की गई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, दुष्कर्म के बाद लड़की की हालत गंभीर हो गई थी और अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था। वह किसी तरह घर पहुंची, लेकिन उसकी तबीयत और बिगड़ गई। आरोप है कि मुख्य आरोपित, उसके पिता और अन्य लोगों ने परिवार को धमकाया और लड़की को अस्पताल या पुलिस के पास ले जाने से रोका। अगले दिन सुबह अत्यधिक रक्तस्राव के कारण 14 वर्षीय लड़की की मौत हो गई।
यह भी आरोप लगाया गया कि पीड़िता के शव का पास के श्मशान घाट में चुपचाप अंतिम संस्कार कर दिया गया। नौ अप्रैल 2022 को शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके 24 घंटे के भीतर सोहेल गायली को गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा था कि निष्पक्ष जांच और पीड़िता के परिवार व आम लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। वहीं, आरोपितों के वकील राजू बनर्जी ने कहा कि वे अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उच्च अदालत का रुख करेंगे।
(Udaipur Kiran) / ओम पराशर



