संदेह और अपूर्ण साक्ष्य के आधार पर नहीं ठहराया जा सकता दोषी-हाईकोर्ट

जयपुर, 20 दिसंबर (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने रिश्वत से जुडे मामले में कहा है कि किसी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ संदेह और अपूर्ण साक्ष्य के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके साथ ही अदालत ने रींगस थाने में तैनात रेलवे सुरक्षा बल के तत्कालीन थानाधिकारी और दो कांस्टेबल को एसीबी कोर्ट से मिली एक साल की सजा को रद्द कर दिया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश कैलाश चंद सैनी व अन्य की ओर से दायर आपराधिक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि रिश्वत मामले में दोषी ठहराने के लिए आरोपी के खिलाफ स्पष्ट मांग, स्वीकृति या बरामदगी सहित लंबित आधिकारिक कार्य का संदेह से परे साबित होना जरूरी है।
याचिका में अधिवक्ता गिरिराज प्रसाद शर्मा ने एक आरोपी की ओर से अदालत को बताया कि साल 2007 में चिरंजी लाल ने एसीबी, सीकर में रिपोर्ट की थी कि रेलवे अधिनियम के तहत रींगस थाने में दर्ज एक मामले में उसका नाम हटाने के बदले आरोपी पांच हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे हैं। एसीबी ने 26 जुलाई को ट्रैप कार्रवाई की और दावा किया कि आरोपी कांस्टेबल सांवरमल मीणा से रिश्वत राशि मिली है। वहीं एसीबी कोर्ट ने साल 2023 में तीनों याचिकाकर्ताओं कैलाश चंद सैनी, जगवीर सिंह और सांवरमल को एक-एक साल की सजा सुनाई थी। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि मामले में परिवादी के बयान विरोधाभासी रहे हैं। वहीं परिवादी और उसके भाई के खिलाफ दर्ज मामले को जांच अधिकारी ने चार्जशीट के लिए पहले ही आगे भिजवा दिया था। ऐसे में याचिकाकर्ता मामले में परिवादी को लाभ पहुंचाने की स्थिति में नहीं था। इसके साथ ही ट्रैप कार्रवाई के समय किसी को स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया गया। ऐसे में एसीबी कोर्ट के आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने एसीबी कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया है।
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(Udaipur Kiran)



