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Saturday, 31 October 2026
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हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा स्पष्टीकरण

इलाहाबाद हाईकाेर्ट

–गैंगस्टर एक्ट में प्राविधान के बावजूद डीएम को शामिल क्यों नहीं किया जा रहा है

प्रयागराज, 22 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से इस बात का स्पष्टीकरण मांगा है कि यूपी गैंगस्टर नियम 2021 के नियम 5(3)(ए) के आदेश के बावजूद डीएम को क्यों शामिल नहीं किया जा रहा था। जिसमें गैंग चार्ट को मंज़ूरी देने के लिए डीएम और एसएसपी-पुलिस कमिश्नर के बीच संयुक्त बैठक अनिवार्य है।

यूपी गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) नियम 2021 के तहत एक मामले की सुनवाई करते हुए, जिसमें एक्ट के अनुसार संतुष्टि के बिना एफआईआर रद्द करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने पाया कि जिन जिलों में कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया था, वहां गैंग चार्ट को ऐसी मीटिंग में मंजूरी नहीं दी जा रही थी, जिसमें डीएम शामिल हों। हालांकि जहां कमिश्नरेट सिस्टम नहीं था, वहां गैंग चार्ट को मंज़ूरी देने के लिए डीएम और एसएसपी के बीच संयुक्त बैठक होती थी।

यह देखते हुए कि गैंगस्टर नियमित रूप से जमानत की शर्तों का उल्लंघन करते हैं और कोर्ट में बार-बार सुनवाई टाली जाती है। कोर्ट ने कहा कि असल में एक लोकतांत्रिक राज्य की अवधारणा इस बात पर आधारित है कि हर नागरिक न केवल कानून के सामने बराबर है, बल्कि उसे कानून की सुरक्षा का भी उतना ही हक है और एक कल्याणकारी राज्य की नज़र में वह उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रशासकों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि वे जो फैसले लेते हैं, वे आखिरकार न्याय व्यवस्था को आकार देते हैं और इतिहास न केवल उन फैसलों को दर्ज करता है, बल्कि उन्हें दोहराता भी है। कोर्ट ने कहा कि ’चुनिंदा जांच’ और ’चुनिंदा मुकदमा’ कानून के शासन के खिलाफ हैं और अनिवार्य रूप से शासन में जनता के भरोसे को खत्म करते हैं।”

राज्य ने ऐसे गैंगस्टरों के खिलाफ मामलों के तेज़ी से निपटारे के लिए, गवाहों को पेश करने के लिए, गवाह सुरक्षा योजनाओं को ठीक से लागू करने के लिए, कोर्ट में अभियोजन पक्ष के गवाहों को समय पर पेश करने के लिए, या जिला सरकारी वकीलों को कोर्ट को सार्थक सहायता देने के लिए संवेदनशील बनाने के लिए कोई नीति नहीं बनाई है, और इसके अलावा राज्य सरकार का पुलिस पर जवाबदेही तय करने के लिए पुराने ज़माने की विभागीय जांचों को छोड़कर कोई कार्यक्रम नहीं है, जो अक्सर इंस्पेक्टर और उससे नीचे के रैंक अधिकारियों के खिलाफ शुरू की जाती हैं।

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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे

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