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Wednesday, 28 October 2026
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वृंदावन न जा सके तो गोविंद देव जी के दर्शन से ही प्रिय-प्रियतम की प्राप्ति : देवकीनंदन ठाकुर

सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ
सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ

जयपुर, 15 दिसंबर (Udaipur Kiran) । मानसरोवर के वीटी रोड़ पर मेला ग्राउंड में विश्व शांति सेवा समिति के तत्वावधान में सोमवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ हुई। देवकीनंदन ठाकुर जी की कथा सुनने के लिए सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मेला ग्राउंड में उपस्थित हुए। कथा का शुभारंभ कथा वाचक देवकीनंदन ने ठाकुरजी के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

कथा वाचन करते हुए देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि अगर कोई भी भक्त वृंदावन जाकर राधा-रानी के दर्शन नहीं कर पाता है तो जयपुर के आराध्य देव गोविंद देव जी के दर्शन करने से ही साक्षात राधा- रानी के दर्शनों का फल प्राप्त हो जाता है। कथा के दौरान उन्होने बताया कि काफी सालों बाद सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से उन्हे जयपुर आने का अवसर प्राप्त हुआ है। कथा के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने धर्म को लेकर विशेष बात कही। उन्होंने बताया कि कल आस्ट्रेलिया में कुछ शांति दूतों ने समुद्र के बीच पर गोलियां चलाई है। वहां पर यहूदी अपना त्यौहार मना रहे थे। वहां कोई कृष्ण जन्मभूमि की बात नहीं हो रही थी। उस समुद्र के तट पर कोई जय श्री राम के नारे नहीं लगा रहा था। कोई गीता का पाठ नहीं कर रहा था। कोई कृष्ण जन्मभूमि की मांग नहीं कर रहा था। सनातन बोर्ड की मांग नहीं कर रहा था। वहां कोई भी हिंदू नहीं था। इसके बावजूद काफिरों को मारने के लिए एक विशेष धर्म के व्यक्ति समुद्र तट पर गए। उन सबकी दृष्टि में हम सब काफिर हैं ।

बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों की शिक्षा दो

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि सनातनियों को सोचने और समझने की जरूरत है। अपने बच्चों को शिक्षा के साथ शस्त्र का भी ज्ञान दो। अगर बच्चों को मीरा बाई की तरह भक्त बनाना चाहते है तो उन्हे महाराणा प्रताप जैसा निडर योद्धा बनाओं भी बनाओं। हमे बच्चों को ज्ञान में निपुण बनाना है और अपनी सुरक्षा के लिए सशक्त भी बनाओं। बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनो ही शिक्षा की आवश्यकता पड़ेगी। इसी दौरान उन्होने सनातनी बच्चों में आत्मबल नहीं होने की बात कहीं। उन्होने बताया कि आज के युग के बच्चों में आत्मबल नहीं है और छोटी-छोटी बातों को लेकर वो तनाव में चले जाते है। इसलिए बच्चों को अपने साथ संत्सग आदि धार्मिक आयोजनों में लेकर जाना चाहिए। ताकि बच्चे धर्म के बारे में जान सके।

तिलक ही है सनातनियों की अद्भुत पहचान

कथा पांडाल में तिलक को लेकर नो एंट्री की व्यवस्था लागू की गई थी। इस दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने बताया कि पूजा-पाठ के दौरान जब हम अपने मस्तक पर तिलक लगाते है तो अंगूली से दोनो आंखों के बीच सिर पर दबाव पड़ता है और आज्ञा चक्र ओपन होता है। जिसे हम तीसरी आंख के नाम से जानते है। ये हमारे ज्ञान का चक्षु है। बदलते युग में हमने ही अपने बच्चों को मंदबुद्धि बना रखा है। बच्चों के तिलक लगाने के बारे में कुछ पता ही नहीं है। उन्होने कहा की आज से ही सभी अपने-अपने बच्चों को तिलक लगाने के लिए प्रेरित करें।

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(Udaipur Kiran)

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