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Wednesday, 28 October 2026
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बढ़ती आबादी, प्रदूषण और बेरोजगारी भारत की सबसे बड़ी चुनौती : शांता कुमार

शांता कुमार

शिमला, 15 दिसंबर (Udaipur Kiran) । पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी दिल्ली आज जहरीली हवा के रेड ज़ोन में पहुंच चुकी है। दिल्ली ही नहीं, देश के अनेक शहर गैस चैंबर बनते जा रहे हैं। जहरीली हवा का सबसे गंभीर असर बच्चों पर पड़ रहा है और कैंसर जैसी घातक बीमारियां फैल रही हैं। एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में भारत में लगभग 17 लाख लोगों की मौत केवल वायु प्रदूषण के कारण हुई।

शांता कुमार ने सोमवार को एक बयान में कहा कि भारत विश्व के 193 देशों में अमीर देशों की श्रेणी में शामिल है, लेकिन इसके बावजूद सबसे अधिक गरीब और भूखे लोग भी भारत में ही रहते हैं। इसका मुख्य कारण लगातार टिड्डीदल की तरह बढ़ती जनसंख्या और बढ़ती आर्थिक असमानता है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के बावजूद देश में गरीबी और बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स के अनुसार भारत में लगभग 19 करोड़ लोग रोज़ रात को भूखे पेट सोते हैं। बेरोजगारी बढ़ने से अपराध और आत्महत्याओं के मामलों में भी वृद्धि हुई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष देश में 1 लाख 87 हजार लोगों ने आत्महत्या की, जिनमें 13 हजार छात्र शामिल थे।

शांता कुमार ने कहा कि मनुष्यों के साथ-साथ कुत्तों की आबादी भी इतनी बढ़ गई है कि कुत्तों के काटने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। उन्होंने जनसंख्या विस्फोट के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 1947 में दिल्ली की आबादी केवल 7 लाख थी, जो आज बढ़कर लगभग 3 करोड़ 46 लाख हो गई है। इसी तरह, देश की आबादी 1947 में 35 करोड़ थी, जो आज बढ़कर लगभग 143 करोड़ हो चुकी है और हर वर्ष करीब 2 करोड़ की वृद्धि हो रही है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि गरीबी, बेरोजगारी और जानलेवा प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बेकाबू होती जनसंख्या है। उन्होंने माना कि केवल कानून बनाकर तुरंत समाधान नहीं होगा, लेकिन इससे इस गंभीर समस्या के समाधान की शुरुआत जरूर होगी। उन्होंने सुझाव दिया कि दो बच्चों से अधिक की अनुमति न हो और एक बच्चे वाले परिवारों को विशेष सुविधाएं दी जाएं, ताकि आबादी की वृद्धि रुके और धीरे-धीरे घटनी शुरू हो।

शांता कुमार ने कहा कि विश्व के कई देशों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई है, तो भारत ऐसा क्यों नहीं कर सकता। आज की भयावह समस्याओं से निपटने के लिए जनसंख्या नियंत्रण अनिवार्य है।

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(Udaipur Kiran) शुक्ला

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