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Sunday, 1 November 2026
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पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का शिक्षारंभ व उपनयन संस्कार

आयुर्वेद महाविद्यालय में विद्यारम्भ संस्कार

हरिद्वार, 24 दिसंबर (Udaipur Kiran) । पतंजलि भारतीय आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान (आयुर्वेद महाविद्यालय) के नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं का शिक्षारम्भ एवं एवं उपनयन संस्कार पतंजलि योगपीठ के आयुर्वेद भवन में सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के विद्यार्थी दीक्षित होकर स्वदेशी चिकित्सा के हमारे ध्येय संकल्प को पूरे विश्व में स्थापित करने का कार्य करेंगे। कहा कालांतर में यज्ञोपवीत, वेद, धर्म व अध्यात्म के नाम पर भ्रांतियाँ समाज में व्याप्त हो रही थी। पतंजलि योगपीठ ने इन सभी भ्रांतियों को समाप्त किया है। हमने किसी भी कुल, वंश, जाति व सम्प्रदाय में पैदा हुए व्यक्ति को समान शिक्षा प्रदान की है।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यज्ञोपवीत मात्र प्रतीक नहीं है, यह हमारे सौभाग्य का पर्व है। कहा दुनिया में आए प्रत्येक मनुष्य पर तीन ऋण होते हैं- पहला देव ऋण, दूसरा ऋषि ऋण और तीसरा पितृ ऋण। यज्ञोपवीत के तीन धागे हमारे तीन ऋणों का प्रतीक हैं, जो हमें सदैव यह स्मरण कराते रहते हैं कि हमें परमात्मा, हमारे पूर्वज ऋषियों व गुरुजनों तथा माता-पिता के ऋण से उऋण होना है। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने कर्म से द्विज नहीं है तो जन्म से द्विज होना भी व्यर्थ है। उच्चता, पवित्रता तथा विद्वत्ता को पाने का सभी का समान रूप से अधिकार है।

इस अवसर पर पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल यादव, डॉ. गिरिश के.जे., डॉ. राजेश मिश्र, साध्वी देवसुमना, साध्वी देवस्वस्ति, साध्वी देवविभा सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।

(Udaipur Kiran) / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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