40 साल सर्विस के बाद अस्थायी बताना अनुचित: हाईकोर्ट

कर्मचारी को नियमित मानकर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने के आदेश
जोधपुर, 2 दिसंंंबरर (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने विभाग में लंबी अवधि तक सेवा दी है, तो उसे केवल अस्थायी बताकर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस रेखा बोराणा की एकल पीठ ने चूरू जिले के रतनलाल सैनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मानते हुए उसे पेंशन और अन्य लाभ जारी करने के लिए सरकार को निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता चूरू में तारानगर तहसील निवासी रतनलाल सैनी ने सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और नियमितीकरण की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि रतनलाल ने विभाग में लगभग 40 साल तक सेवाएं दी हैं, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया गया। जो संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि रतनलाल अक्टूबर 2021 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जब कर्मचारी ने जीवन के चार दशक विभाग को दिए हैं तो उसे पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित करना अनुचित है। दूसरी ओर सरकार की तरफ से पेश वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से नहीं हुई थी। वह अस्थायी आधार पर कार्यरत थे, इसलिए वे नियमितीकरण के हकदार नहीं हैं।
कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए इसी तरह के एक अन्य मामले कन्हैयालाल बनाम राजस्थान राज्य के फैसले को आधार बनाया। उस फैसले में कोर्ट ने कहा था कि 37 साल की सेवा देने के बाद यह नहीं कहा जा सकता कि सेवा अस्थायी थी। इतनी लंबी सेवा को मौलिक सेवा माना जाना चाहिए। जस्टिस रेखा बोराणा ने उस फैसले का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार या उसके अधिकारी किसी व्यक्ति को उसकी सेवाओं के बदले मौलिक अधिकारों का दावा करने से वंचित नहीं कर सकते। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की सेवाओं को उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नियमित किया जाए। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को नियमित कर्मचारी मानते हुए पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ जारी किए जाएं।
(Udaipur Kiran) / सतीश



