
झुंझुनू, 3 दिसंबर (Udaipur Kiran) . झुंझुनू जिले में मां-बच्चों की सेहत से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाएं बहुत कमजोर हो रही हैं. जिसकी वजह से अब जिला अस्पतालों पर बड़ा दबाव आ गया है. उप-जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जैसी छोटी स्वास्थ्य इकाइयां लगातार गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क बताकर बड़े अस्पताल में भेज रही हैं. इस कारण पूरे जिले की लगभग 60 प्रतिशत डिलीवरी का बोझ अकेले राजकीय भगवानदास खेतान (बीडीके) हॉस्पिटल झेल रहा है. बार-बार रेफर करने की इस आदत ने न केवल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव बढ़ाया है. बल्कि गरीब और ग्रामीण गर्भवती महिलाओं के लिए जोखिम भी बढ़ा दिया है. एक बड़ी चिंता यह भी है कि छोटे अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर की सुविधा होने के बावजूद उसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. जिससे मरीजों को बेवजह दूर के बड़े अस्पताल में जाना पड़ रहा है. राजकीय बीडीके अस्पताल में जनवरी 2025 से 24 अक्टूबर तक 2629 प्रसव हुए हैं. जिनमें 1565 नॉर्मल और 964 सिजेरियन प्रसव शामिल हैं.
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. जितेंद्र भांबू के अनुसार हॉस्पिटल में हुए कुल प्रसव मामलों में से 36 प्रतिशत से अधिक ऐसे मामले हैं जो जिले के अन्य हेल्थ केंद्रों से रेफर होकर आए हैं. स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी और हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं को बड़े अस्पतालों में रेफर करने की मजबूरी के कारण बीडीके हॉस्पिटल पर लगातार बोझ बना रहता है.
जिले की प्रसव सेवाओं की सबसे गंभीर स्थिति 35 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) पर है. सीधे रेफर की प्रवृत्ति अधिकांश केंद्र गर्भवती महिलाओं को हाई रिस्क बताकर सीधे जिला अस्पताल रेफर कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार कई सीएचसी ऐसे हैं जहा एक भी प्रसव दर्ज नहीं हुआ है. इस लापरवाही पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले भी दर्जनभर से ज्यादा नोटिस जारी किए जा चुके हैं. लेकिन जमीनी हालात में कोई सुधार नहीं आया है. सरकारी अस्पतालों में बिस्तर न मिलने या रेफर होने के डर से कई गर्भवती महिलाएं अब निजी अस्पतालों का रुख कर रही हैं. यहां माना जाता है कि सिजेरियन प्रसव को अधिक बढ़ावा मिल रहा है.
उप जिला अस्पताल खेतड़ी में प्रसव का लगभग आधा हिस्सा रेफर कर दिया गया है. यहां के दोनों अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव का आंकड़ा शून्य होना यह दर्शाता है कि हाई रिस्क मामलों को स्थानीय स्तर पर संभाला ही नहीं जा रहा है. इसका सीधा अर्थ है कि इन केंद्रों पर ऑपरेशन थिएटर की सुविधा या प्रशिक्षित विशेषज्ञों का उपयोग नहीं हो रहा है.
पीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार सबलानिया ने बताया कि उनके पास ब्लॉक और अन्य अस्पतालों से रेफर होकर आए मामलों का कोई अलग से रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. क्योंकि सभी महिलाओं की नई रजिस्ट्रेशन पर्ची कटवाई गई है.
—————
(Udaipur Kiran) / रमेश
