वादकारी अधिक पढ़ा नहीं होता, उससे कानून के बारीकियों की उम्मीद नहीं : हाईकाेर्ट

–हाईकोर्ट ने अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
प्रयागराज, 19 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि वादकारी अधिक पढ़ा-लिखा नहीं होता, उससे यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे कानून की बारीकियों और अनुकम्पा नियुक्ति के लिए लागू नियमों की जानकारी हो। जबकि प्रशासनिक अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी है कि अपना काम पूरी सावधानी पूर्वक करें। याची को अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा भुगतने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।
कोर्ट ने राज्य सड़क परिवहन निगम को दो हफ्ते में नियमानुसार कार्रवाई कर 7 जनवरी तक कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अमित कुमार सिंह की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याची के पिता निगम में कंडक्टर थे जिनकी सेवाकाल में 30 जुलाई 2000 को मौत हो गई। याची की मां ने विभाग को सूचना दी कि पुत्र नाबालिग है, इसलिए बालिग होने पर आश्रित नियुक्ति पर विचार किया जाय। बालिग होने के बाद याची की अर्जी पर विचार किया गया और उसे संविदा पर नियुक्ति दी गई। कई वर्ष सेवा करने के बाद याची ने संविदा नियुक्ति को चुनौती देते हुए कहा मृतक आश्रित सेवा नियमावली के अंतर्गत स्थाई नियुक्ति का नियम है। इसलिए उसकी भी स्थाई नियुक्ति की जाय। याची का कहना है कि उसे पहले कानून की जानकारी नहीं थी। विभाग का दायित्व था कि उसकी नियुक्ति कानूनी उपबंधों के तहत करे।
विभाग के अधिवक्ता का कहना था कि याची ने संविदा नियुक्ति स्वीकार की है इसलिए लम्बी सेवा के बाद वह उसके विरुद्ध दावा नहीं कर सकता। जिस पर कोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार काम करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। इसलिए नियमानुसार याची की नियुक्ति की कार्यवाही कर कोर्ट को जानकारी दें।
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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे



