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Saturday, 31 October 2026
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मुस्लिम महिला का हिजाब खींचने पर मौलाना महमूद मदनी ने नीतीश की तीखी आलोचना की

मीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी

नई दिल्ली, 22 दिसंबर (Udaipur Kiran) । जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक हिजाब पहनी मुस्लिम महिला का नक़ाब खींचने और इसके बाद सांप्रदायिक तत्वों द्वारा इस कृत्य का न केवल समर्थन किए जाने, बल्कि भड़काऊ और नफ़रत भरे बयान दिए जाने पर गहरी चिंता और खेद व्यक्त किया है।

मौलाना मदनी ने कहा कि हिजाब सिर्फ पहनावे का मामला नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे मौलिक संवैधानिक अधिकारों से सीधे तौर पर जुड़ा है, जिसे भारत के संविधान द्वारा पूर्ण रूप से संरक्षण प्राप्त है। किसी भी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के जरिए इतने संवेदनशील मामले में इस तरह का व्यवहार न केवल संबंधित महिला का अपमान है, बल्कि इससे पूरे देश की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंची है।

मौलाना मदनी ने कहा कि इस घटना का सबसे दुखद पहलू यह है कि सभी वर्ग की महिलाएं, विशेषकर मुस्लिम महिलाएं, अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहती हैं। इस तरह की घटनओं से न केवल उनकी चिंता बढ़ेगी बल्कि यह भी आशंका है कि निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी भी हिजाब पहनने वाली महिलाओं के साथ इससे कहीं अधिक अनुचित, अपमानजनक और आक्रामक रवैया अपनाने का साहस कर सकते हैं।

मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि जमीअत उलमा-ए-हिंद इस मामले पर हमेशा जोर देती रही है कि धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से संबंधित मामलों को राजनीतिक स्वार्थों या अगंभीर एवं गैरजिम्मेदाराना रवैये की भेंट चढ़ाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि देश की गंगा-जमुनी पहचान और आपसी सम्मान के जरूरी है कि सभी नागरिकों के धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों का पूर्ण सम्मान सुनिश्चित किया जाए। मौलाना मदनी ने यह मांग की कि नीतीश कुमार इस घटना के दूरगामी सामाजिक कुप्रभावों पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल माफी मांगें और यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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(Udaipur Kiran) / मोहम्मद शहजाद

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