
जयपुर, 2 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Rajasthan हाईकोर्ट ने प्रदेश की जर्जर स्कूलों की मरम्मत नहीं करने का रोडमैप पेश नहीं करने पर नाराजगी जताई है. इसके साथ ही अदालत ने दो दिन में रोडमैप पेश नहीं करने पर 5 दिसंबर को शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत या वीसी के जरिए पेश होने को कहा है. अदालत ने मामले में मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार प्रवासी Rajasthanी समारोह करा रही है और शहर के सौंदर्यीकरण के लिए पैसा खर्च किया जा रहा है, लेकिन समय की जरूरत होने के बावजूद भी स्कूलों पर पैसा खर्च नहीं किया जा रहा है. अदालत ने मौखिक रूप से चेतावनी दी कि यदि स्कूलों के लिए पैसा नहीं दिया तो सरकार के बाकी खर्च रोक दिए जाएंगे. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार कभी केन्द्र सरकार से बजट आने का कहती है तो कभी दूसरे मद से राशि मिलने की बात करती है, लेकिन सरकार के पास पैसा नहीं है.
जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने यह आदेश झालावाड़ में सरकारी स्कूल की छत गिरने से बच्चों की मौत के बाद लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए. सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद अदालत में पेश हुए. उनकी ओर से रोडमैप पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा. इस पर अदालत ने कहा कि कई बार अवसर दिए जाने के बाद राज्य सरकार की ओर से अभी तक रोडमैप पेश नहीं किया गया है. ऐसे में आगामी सुनवाई तक रोडमैप पेश नहीं करने की सूरत में शिक्षा सचिव पेश होकर अपना जवाब दें. अदालत ने 6 नवंबर को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि सरकार साल 2047 के विजन की बात करती है, लेकिन स्कूलों को लेकर कल की प्लानिंग भी नहीं है. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को जानकारी दी गई थी कि प्रदेश में करीब 86 हजार स्कूली कमरे क्षतिग्रस्त हैं, लेकिन राज्य सरकार ने यह नहीं बताया था कि इन सभी कमरों को ठीक कैसे किया जा सकता है. इसके अलावा निर्माणाधीन इमारत और मरम्मत का बजट भी अलग-अलग नहीं बताया था.
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(Udaipur Kiran)
