राजस्थान हाईकोर्ट : बासनपीर छतरी प्रकरण में जांच अधिकारी नहीं पहुंचा कोर्ट

जोधपुर, 20 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने बासनपीर छतरी पुनर्निमाण प्रकरण में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने जैसलमेर के सदर थानाधिकारी के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई मामले की सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी की बार-बार अदालत में गैर-हाजिरी पर हुई है।
मामला तीन माह पुराना है, जब बासनपीर जूनी क्षेत्र में ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर हुए विवाद को सांप्रदायिक रंग देकर राजकार्य में बाधा का केस दर्ज किया गया था। इसमें करीब 250 लोगों को नामजद और 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अदालत में दायर याचिका में आरोप है कि एफआईआर में दर्ज घटनाक्रम का समय गलत है, क्योंकि आरोपी उस दौरान एक सरकारी स्कूल में ड्यूटी पर था। जांच अधिकारी की लापरवाही और अदालती निर्देशों की अवहेलना से नाराज हाईकोर्ट ने यह कठोर कदम उठाया है। इस प्रकरण में आरोपियों में एक इस्लाम खान ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सरवर खान ने न्यायालय को अवगत कराया कि एफआईआर में दर्शाया गया घटना का समय तथ्यात्मक रूप से गलत है। उस समय वे सरकारी विद्यालय में ड्यूटी कर रहे थे। इस संबंध में दस्तावेजी प्रमाण भी उपलब्ध कराए गए।
जांच अधिकारी की अनुपस्थिति पर कोर्ट नाराज
राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को केस डायरी सहित न्यायालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जांच अधिकारी नहीं आए, इस पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया। न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह ने जैसलमेर के सदर थानाधिकारी के विरुद्ध जमानती वारंट जारी किया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सरवर खान ने कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है। बासनपीर जूनी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक छतरियों के पुनर्निर्माण को लेकर करीब तीन माह पहले स्थानीय स्तर पर विवाद उत्पन्न हुआ था। आरोप है कि इस निर्माण कार्य को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन को कथित रूप से साम्प्रदायिक रंग देते हुए राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज कर लिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को नामजद किया गया, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई थी।
(Udaipur Kiran) / सतीश



