चुरूलिया के संग्रहालय कवितीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य जल्द होगा शुरू,

आसनसोल, 22 दिसंबर (Udaipur Kiran) । कवि काजी नजरूल के संग्रहालय कवितीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू करने को लेकर सोमवार को जिला प्रशासन तथा विश्वविद्यालय की संयुक्त टीम ने चुरुलिया का दौरा किया।
उल्लेखनीय है कि काजी नजरूल के चीजों को चुरूलिया स्थित संग्रहालय कवितीर्थ में संरक्षित कर रखा गया था। लेकिन पर्यटन विकास निगम के द्वारा काजी नजरूल के घर तथा परमिला देवी की समाधि का जीर्णोद्धार करने के लिये एतिहासिक वस्तुओं को वहां से हटाने की आवश्यकता थी।
काजी नजरूल विश्वविद्यालय इन वस्तुओं को संभालकर रखने का आश्वासन दिया था। लेकिन काजी परिवार, संग्रहालय प्रबंधक कमेटी के सदस्य इससे सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि कवि के वस्तुओं को चुरूलिया से बाहर लेकर जाने नहीं दिया जाये। कवितीर्थ के आधुनिकीकरण का कार्य पूरा करने के लिये कवि के वस्तुओं को गांव में ही कहीं रखना होगा। जिसे लेकर पर्यटन विकास निगम कवितीर्थ के जीर्णोद्धार का कार्य कर नहीं पा रहा था।
सोमवार को वीसी के नेतृत्व में टीम ने चुरूलिया के संग्रहालय का दौरा किया।
इस बारे में जानकारी देते हुये एडीएम कौशिक सिन्हा ने बताया कि पर्यटन विकास निगम के द्वारा कवितीर्थ के जीणोद्धार का कार्य किया जाएगा। जिसको लेकर चुरूलिया कवितीर्थ संग्रहालय का दौरा किया गया। जिसमें कवि की पत्नी परमिला देवी की समाधि का जीर्णोद्धार का कार्य किया जायेगा। साथ ही उनके पैतृक घर का जीर्णोद्धार होगा। इसके लिये संग्रहालय से कवि के एतिहासिक धरोहर को आगामी 29 दिसम्बर को चुरूलिया स्थित युथ हॉस्टल में स्थानांतरित किया जाएगा।
कवि के एतिहासिक धरोहर को यूथ हॉस्टल में रखने के बाद उसकी सुरक्षा का इंतजाम की व्यवस्था की जायेगी। जीर्णोद्धार का कार्य पूरा होने के बाद उनकी चीजो को वापस यथा स्थान पर रख दिया जायेगा। जीर्णोद्धार का कार्य केएनयू तथा पर्यटन विकास निगम के द्वारा किया जायेगा जबकि जिला प्रशासन लॉजिस्टिक सहयोग और सुरक्षा प्रदान करेगा।
मौके पर केएनयू के उप कुलपति उदय बनर्जी, अतिरिक्त जिलाधिकारी (विकास) कौशिक सिन्हा, जामुडिया के प्रखंड अधिकारी तापस पाल, पर्यटन विभाग प्रभारी अदिति गांगुली, नजरूल विद्यापीठ के प्राधानाचार्य डॉ दीपांकर मजूमदार, कवि प्रसनजीत घोष, काजी नजरूल के परिवार सोनाली काजी और चुरूलिया गांव के लोग मौजूद रहे।
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(Udaipur Kiran) / संतोष विश्वकर्मा



