
Prayagraj, 03 दिसम्बर (Udaipur Kiran) . इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने लोकोमोटिव डिसेबिलिटी से पीड़ित दिव्यांग याची के बिना किसी मदद न्यायालय पहुंचने पर रजिस्ट्री से सवाल किया है. कोर्ट ने जानना चाहा कि ऐसे याची जो दिव्यांग हैं और बिना किसी मदद के चलने फिरने में Assamर्थ हैं, उनके लिए हाईकोर्ट में क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि याची बिना किसी कठिनाई के न्यायालय तक पहुंच सके.
यह मामला तब उठा, जब अपनी पसंद से शादी करने वाला आगरा का एक युगल सुरक्षा की मांग को लेकर न्यायालय पहुंचा. इनमें सिमरन ने याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की क्योंकि उसके घर वाले शादी के खिलाफ़ थे.
न्यायमूर्ति अजय भनोट एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष उपस्थित मो मुजीब लोकोमोटिव डिसेबिलिटी से पीड़ित है. वह बड़ी कठिनाई से न्यायालय तक पहुंचा. यह देखते हुए कोर्ट के निर्देश पर उसे तत्काल व्हीलचेयर व एक सहायक दिया गया. रजिस्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए कई प्रकार की सहायता और उपकरण उपलब्ध हैं. याची के आने के बारे में रजिस्ट्री को जानकारी नहीं दी गई इसलिए उसे सहायता उपलब्ध नहीं कराई जा सकी.
अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम परितोष कुमार मालवीय ने कोर्ट को बताया कि दोनों याची बालिग हैं और सिमरन ने पुलिस व मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया है कि वह पति के साथ रहना चाहती है. कोर्ट ने कहा कि याची दिव्यांग होने के बावजूद निर्वाचित सभासद भी है. यह उसकी विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की हिम्मत को दिखाता है. कोर्ट ने डीसीपी आगरा को याची को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया. साथ ही अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करने को कहा है. रजिस्ट्री को भी यह बताने का निर्देश दिया है कि दिव्यांग याचियों के लिए क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं ?
—————
(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे
