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Friday, 30 October 2026
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जम्मू कश्मीर के युवा अब देश के इतिहास मूल्यों और आकांक्षाओं से गहराई से जुड़ रहे हैं-उपराज्यपाल

जम्मू कश्मीर के युवा अब देश के इतिहास मूल्यों और आकांक्षाओं से गहराई से जुड़ रहे हैं-उपराज्यपाल

श्रीनगर, 16 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) । उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को कहा कि जम्मू कश्मीर के युवा अब देश के इतिहास मूल्यों और आकांक्षाओं से गहराई से जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि युवा राष्ट्र निर्माण के लिए विविधता, विरासत के साथ संबंध बना रहे हैं और साझा सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा दे रहे हैं। उपराज्यपाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कुलगाम में वेशॉ साहित्य महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

दो दिवसीय साहित्य उत्सव पुस्तकों, नए विचारों को साझा करने और चर्चा करने और विभिन्न रचनात्मक और साहित्यिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए लेखकों, कलाकारों और पाठकों को एक साथ लाकर साहित्य का जश्न मना रहा है।

उपराज्यपाल ने कहा कि लिट फेस्ट क्षेत्र की अनूठी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक महत्व का भी पता लगाएगा और महिला लेखकों और युवा लेखकों को अपने रचनात्मक कार्यों को साझा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा। यह कार्यक्रम साहित्य की सराहना को बढ़ावा देगा और सामुदायिक बंधन को मजबूत करेगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू कश्मीर के प्रमुख साहित्यकारों की रचनाओं ने पीढ़ियों को प्रेरित किया है।

उन्होंने कहा कि कुलगाम एक समृद्ध आध्यात्मिक और बौद्धिक परंपरा के प्रमाण के रूप में खड़ा है। कुलगाम प्रकृति आध्यात्मिकता, संस्कृति और साहित्य का संगम है जो इस पवित्र भूमि को जम्मू कश्मीर की विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। उपराज्यपाल ने युवा प्रतिभाओं के लिए अवसर पैदा करने के महत्व पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयासों से न केवल मानव रचनात्मकता का विस्तार होगा बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि साहित्य एक दर्पण के रूप में काम करेगा, जो सामाजिक और वैश्विक परिवर्तनों को प्रतिबिंबित करेगा।

उपराज्यपाल ने कहा कि प्रगतिशील और जीवंत समाज के लिए विज्ञान आध्यात्मिकता और साहित्य तीन शक्तिशाली ताकतें हैं। लेखकों, विचारकों और कवियों को साहित्यिक, वैज्ञानिक और आध्यात्मिक विरासत को बढ़ावा देना चाहिए लोक परंपराओं को समृद्ध करना चाहिए और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना चाहिए। उन्हें सार्वजनिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालना चाहिए और हाशिये पर पड़े लोगों की आवाज बनना चाहिए।

उन्होंने लेखकों और कवियों से जम्मू कश्मीर में झूठी कहानियों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने और नई पीढ़ी को उज्जवल वास्तविकता से परिचित कराने और उन्हें नए दृष्टिकोण प्रदान करने का भी आह्वान किया।

(Udaipur Kiran) / राधा पंडिता

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