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Thursday, 29 October 2026
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वैश्विक बाजार में बने रहने के लिए कपड़ा उद्योग को बढ़ानी होगी तकनीकी क्षमता- गिरिराज सिंह

केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह

नई दिल्ली, 20 दिसंबर (Udaipur Kiran) । केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने शनिवार को कहा कि कपड़ा उद्योगों को वैश्विक पटल पर बने रहने के लिए अपनी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना होगा। उन्होंने वस्त्र उद्योग में अधिक बदलाव के लिए अनुसंधान और नवाचार पर जोर दिया।

कपड़ा मंत्री ने आज दिल्ली में वस्त्र अनुसंधान संघों की पहली संयुक्त बैठक में यह बात कही। इस बैठक को कपड़ा मंत्रालय ने आयोजित किया। इसमें सस्टेनेबिलिटी (सतत), नए फाइबर के नवाचार और कपड़ा अनुसंधान संघों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा, अनुसंधान और नवाचार ऐसा मार्ग है, जिसके माध्यम से ह्म संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं। इससे ही ‘अर्थ ओवरशूट डे’ जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटा जा सकता है। इसके अलावा, नए जमाने के रेशों और तकनीकी फाइबर के इस्तेमाल से ही वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमा सकते हैं।”

मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक फाइबर जैसे बांस, सीसल, हेंप और पाइनएप्पल फाइबर को औद्योगिक उपयोग तथा रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार का लक्ष्य है कि रेमी और फ्लैक्स जैसे फाइबर का उत्पादन देश में ही बढ़ाया जाए जिससे व्यापार घाटा कम हो सके। उन्होंने बताया कि पहले सेनेटरी नैपकिन का आयात होता था, लेकिन अब स्वदेशी तकनीकी फाइबर से आयात घटा है। अब चुनौती इनके ‘डिस्पोजल’ और ‘वेस्ट मैनेजमेंट’ की है, जिसके लिए पानी में घुलनशील फाइबर पर काम हो रहा है। इसके अलावा, हाइड्रोजन फ्यूल भंडारण के लिए कार्बन फाइबर सिलेंडर बनाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अनुसंधान संघों को चेतावनी दी है कि कोई भी अनुसंधान तब तक सफल नहीं है जब तक वह लैब से निकलकर उद्योग क्षेत्र और बाजार तक न पहुंचे। उन्होंने टीआरए, एटीआईआरए, एसआईटीआरए और एनआईटीआअरए जैसी सभी संस्थाओं को मिलकर काम करने की सलाह दी और कहा है कि एमएमएफ और न्यू एज फाइबर में चीन जैसे देशों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करने के लिए गति बढ़ानी होगी।

उल्लेखनीय है कि मंत्रालय का भारत को 12 महीने इस्तेमाल होने वाले कपड़ों का ‘ग्लोबल हब’ बनाने का सपना है। इसके लिए राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन और पीएलआई योजना को और मजबूती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।

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(Udaipur Kiran) / श्रद्धा द्विवेदी

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