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Thursday, 29 October 2026
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विजय दिवस पर सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय में 1971 युद्ध के नायकों को दी श्रद्धांजलि

विजय दिवस
विजय दिवस

कोलकाता, 16 दिसंबर (Udaipur Kiran) । विजय दिवस के अवसर पर मंगलवार को कोलकाता के विजय दुर्ग स्थित सेना के पूर्वी कमान मुख्यालय में 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ सी.वी. आनंद बोस, मिजोरम के राज्यपाल जनरल वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त), पूर्वी कमान के सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आर.सी. तिवारी, भारत के वीर पूर्व सेनानी, भारतीय सशस्त्र बलों के अधिकारी और बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ।

बांग्लादेश प्रतिनिधिमंडल में मोहम्मद हबीबुल आलम, मेजर अलिक कुमार गुप्ता (सेवानिवृत्त), मेजर कमरुल आबेदीन (सेवानिवृत्त), मेजर मनीष देवन (सेवानिवृत्त), मेजर मोहम्मद अब्दुल हकीम (सेवानिवृत्त), ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद लुत्फुर रहमान, मेजर शेर-ए-शहबाज और ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद हाफिजुर रहमान शामिल थे। रहमान ने बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। सभी ने मिलकर 1971 के मुक्ति संग्राम में शहीद हुए भारतीय और बांग्लादेशी योद्धाओं को नमन किया।

इस अवसर पर मिजोरम के राज्यपाल वी.के. सिंह ने कहा कि 16 दिसंबर वह ऐतिहासिक दिन है जब भारतीय सशस्त्र बलों और बांग्लादेश के मुक्ति योद्धाओं ने निर्णायक विजय हासिल की थी। यह विजय केवल सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि साहस, बलिदान और न्याय की जीत का प्रतीक थी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को हमेशा ये इतिहास याद रखना चाहिए।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉक्टर सी.वी. आनंद बोस ने कहा कि विजय दिवस पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ भारत के कड़े एक्शन का प्रतीक है। इस मौके पर जिन लोगों ने दोनों देशों की तरफ से लड़ते हुए बलिदान दिया, उन्हें हमेशा याद किया जाना चाहिए। यह आयोजन उन्हीं के सम्मान में है।

भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने अपने बयान में कहा कि इस तरह की साझा स्मृति से जुड़े कार्यक्रम भारत और बांग्लादेश के बीच भाईचारे और आपसी सम्मान के रिश्तों को और मजबूत करते हैं। विजय दिवस का यह आयोजन दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मित्रता और साझा संघर्ष की याद को एक बार फिर जीवंत करता है।

उल्लेखनीय है कि विजय दुर्ग में विजय दिवस की याद में सप्ताह व्यापी कार्यक्रम का आयोजन होता है। सात दिसंबर को कर्टन रेजर के साथ ही इसकी शुरुआत हुई थी। 15 दिसंबर को कोलकाता के ऐतिहासिक रेस कोर्स मैदान में सैन्य शक्ति का शानदार प्रदर्शन किया गया था, जिसमें भारतीय सेना के वीर जवानों ने घुड़सवारी, स्काई डाइविंग, फ्लाई फास्ट और कॉम्बैट का अद्भुत प्रदर्शन किया था।

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(Udaipur Kiran) / ओम पराशर

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