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Saturday, 31 October 2026
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साइबर अपराधों पर लगाम के लिए संचार साथी ऐप की जरूरत पर केंद्रीय संचार मंत्री ने संसद में दिया जवाब

संचार साथी ऐप

नई दिल्ली, 3 दिसंबर (Udaipur Kiran) । साइबर अपराध, मोबाइल चोरी, फर्जी कनेक्शन और डिजिटल फ्रॉड के तेजी से बढ़ते मामलों के बीच संचार साथी ऐप भारत की डिजिटल सुरक्षा के लिए बहुत अहम है। इस एप को लेकर विपक्षी पार्टियों के सवालों पर केंद्र सरकार ने कहा कि संचार साथी न तो जासूसी का माध्यम है और न ही निगरानी का औजार, बल्कि यह नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए तैयार किया गया रियल-टाइम साइबर डिफेंस सिस्टम है।

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में आज एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने इसे किसी भी फोन पर अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का निर्देश नहीं दिया है। यह ऐप अपने आप फोन में सक्रिय नहीं होता और उपयोगकर्ता की अनुमति के बिना कोई डेटा एक्सेस नहीं करता। न यह कॉल सुन सकता है, न रिकॉर्ड कर सकता है, न लोकेशन ट्रैक करता है और न ही मैसेज पढ़ने में सक्षम है। यदि कोई व्यक्ति इसे उपयोग नहीं करना चाहता, तो इसे फोन से हटाया भी जा सकता है। इसे चलाने के लिए उपयोगकर्ता की सहमति, यूजर आईडी और जानकारी आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति इसे नहीं चाहता, तो वह अपने फोन से ऐप को डिलीट भी कर सकता है।

सिंधिया ने कहा कि साल 2023 में शुरू हुए संचार साथी पोर्टल और साल 2025 में लॉन्च हुए ऐप ने मोबाइल चोरी, फर्जी मोबाइल कनेक्शन और साइबर फ्रॉड के खिलाफ लड़ाई में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। यह ऐप सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्री (सीईआईआर) से जुड़ा है, जिसके जरिए चोरी या गुम हुए मोबाइल को तुरंत ब्लॉक किया जा सकता है और उनकी लोकेशन ट्रेस की जा सकती है।

संचार साथी ऐप साल 2023 में शुरू हुए संचार साथी पोर्टल और 2025 में लॉन्च हुए मोबाइल ऐप का अपडेट है। संचार साथी एप को सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्ट्री (सीईआईआर) से जोड़ कर चोरी या गुम हुए मोबाइल का आईएमईआई तुरंत ब्लॉक कर दिया जाएगा और गुम हुए फोन की लोकेशन तुरंत ट्रेस कर लिया जाएगा। सीईआईआर के डेटा के मुताबिक, भारत में हर मिनट लगभग 11 मोबाइल फोन चोरी या गुम हो जाते हैं, यानी प्रतिदिन सवा लाख से ज्यादा और सालाना 50 लाख से अधिक मोबाइल या तो चोरी होते हैं या गुम होते हैं। इतने बड़े पैमाने पर चोरी होने वाले उपकरण बड़ी संख्या में नकली आईएमईआई लगाकर ब्लैक मार्केट में भी बेचे जाते हैं। संचार साथी पूरे साइबर अपराध पर लगाम लगा देगा।

दूरसंचार विभाग (डीओटी) के आंकड़ों के मुताबिक, इस ऐप के लॉन्च होने के बाद अब तक 42 लाख से अधिक मोबाइल फोन ब्लॉक किए जा चुके हैं और 26 लाख से अधिक चोरी हुए फोन की लोकेशन ट्रैक की जा चुकी है। यह संख्या साल 2023-24 के मुकाबले चार गुना अधिक है, जो दर्शाता है कि ऐप ने मोबाइल चोरी की रोकथाम और रिकवरी की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इससे आम लोगों को सेकेंड हैंड मोबाइल फोन खरीदने से पहले इसका आईएमईआई का रिकार्ड चेक करने की सहूलियत भी होगी, जिससे चोरी हुए मोबाइल फोन का आम बाजारों में बिकना बहुत हद तक मुश्किल हो जाएगा।

इसके अलावा अपराधी बर्नर (आस्थाई) फोन का उपयोग ड्रग तस्करी, मानवीय तस्करी, टेरर फंडिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे संगठित अपराधों में भी करते हैं। इस तरीके के इस्तेमाल पर भी संचार साथी के जरिए अब तक 1.43 करोड़ से अधिक फर्जी मोबाइल कनेक्शनों को बंद किया गया है।

संचार साथी में मौजूद नॉट माई नंबर फीचर से लॉगिन के बाद उपयोगकर्ता अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की सूची देख सकेगा और अगर उसमें कोई अनधिकृत नंबर मिलता है, तो उसकी रिपोर्ट कर सकेगा। इससे पहचान चोरी और फर्जी सिम कनेक्शनों पर तत्काल रोक लगेगी।

इस एप में दिया “चक्षु” फीचर किसी भी संदिग्ध कॉल, एसएमएस या व्हाट्सऐप मैसेज को सिर्फ 30 सेकंड में रिपोर्ट कर देगा। रिपोर्ट दर्ज होते ही यह सीधे सीईआईआर, टेलीकॉम धोखाधड़ी प्रबंधन और उपभोक्ता संरक्षण प्रणाली (टैफकॉप) और साइबर क्राइम सिस्टम से जुड़कर कार्रवाई शुरू भी कर देगा।

इस ऐप से अब तक 1.43 करोड़ से अधिक फर्जी कनेक्शन बंद किए गए, 17 लाख के करीब नकली या संदिग्ध व्हाट्सऐप अकाउंट निष्क्रिय किए गए और 20 हजार से अधिक बल्क एसएमएस भेजने वालों को ब्लैकलिस्ट किया गया, जिससे टेलीकॉम फ्रॉड में भारी गिरावट आई है।

संचार साथी ऐप की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2025 तक इसके 50 लाख से अधिक डाउनलोड हो चुके थे, जबकि अब तक गूगल प्ले स्टोर पर एक करोड़ और एप्पल स्टोर पर 9.5 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज किए जा चुके हैं। इस एप पर अब तक कुल 1.14 करोड़ से अधिक पंजीकरण किए जा चुके हैं।

इस एप में मौजूद “कीप योरसेल्फ अवेयर” फीचर लोगों को साइबर खतरे, डिजिटल सतर्कता और सुरक्षा उपायों के बारे में लगातार अपडेट देता रहेगा।

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(Udaipur Kiran) / प्रशांत शेखर

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