पार्वती की तपस्या से भगवान शिव का विवाह संभव हुआ

उदयपुर, अगस्त 23: उदयपुर के नारायण सेवा संस्थान में चल रही ‘अपनों से अपनी बात—भोलेनाथ के साथ’ शिव कथा में sunday को देवी पार्वती की कठिन तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह का वर्णन किया गया.

संगठन के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि देवी पार्वती ने राजसी सुखों का त्याग कर भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा से कठोर तपस्या की. प्रारंभ में उन्होंने केवल कंद-मूल और फल खाकर जीवन बिताया और बाद में उन्होंने पत्तियों का भी त्याग कर दिया. इसी कारण उन्हें ‘अपरना’ के नाम से जाना जाने लगा.

उन्होंने कहा कि पार्वती की तपस्या का इतना गहरा प्रभाव पड़ा कि प्रकृति भी उनकी भक्ति के आगे झुकने लगी. जंगली जानवरों ने अपनी दुश्मनी छोड़ दी, सूर्य की गर्मी कम हो गई और नदियों का प्रवाह भी धीमा हो गया.

अग्रवाल ने कहा कि उनकी तपस्या का प्रभाव तीनों लोकों में महसूस किया गया और यहां तक कि इंद्र का सिंहासन भी हिलने लगा. चिंतित देवताओं ने भगवान ब्रह्मा के पास जाकर बताया, जिन्होंने उन्हें बताया कि तपस्या करने वाली महिला स्वयं देवी पार्वती हैं और उनका भगवान शिव से विवाह उनके सबसे बड़े संकट—तारकासुर के बढ़ते आतंक को समाप्त करेगा.

उन्होंने कहा कि सप्तर्षियों ने बाद में पार्वती की दृढ़ता का परीक्षण किया. भगवान शिव ने स्वयं एक वृद्ध व्यक्ति के रूप में उनकी भक्ति की Examination ली. हालांकि, पार्वती अपने निर्णय से नहीं हटीं और भगवान शिव के प्रति अपनी भक्ति में दृढ़ रहीं.

अंततः, उनकी कठोर तपस्या, मजबूत विश्वास और दृढ़ संकल्प सफल हुए और शिव और शक्ति का दिव्य विवाह संपन्न हुआ. भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय की कहानी भी सुनाई गई, जिसके बाद तारकासुर की पराजय की कथा का वर्णन किया गया.

नारायण सेवा संस्थान से जुड़े विकलांग व्यक्तियों सहित सैकड़ों भक्तों ने इस कथा में भाग लिया. भक्तों ने भगवान शिव और देवी पार्वती की कहानियों को सुनते हुए भक्ति का माहौल बनाए रखा.

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