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Friday, 30 October 2026
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बड़कागांव में अदाणी फाउंडेशन की निःशुल्क एंबुलेंस बनी जीवनरक्षक

एंबुलेंस की तस्वीर

हजारीबाग, 29 दिसंबर (Udaipur Kiran) ।

बड़कागांव प्रखंड के छावनिया पुल के नीचे एक छात्र के अचेत अवस्था में मिलने से आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही अदाणी फाउंडेशन की इमरजेंसी एंबुलेंस मौके पर पहुंची और प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को तत्काल बेहतर इलाज के लिए हजारीबाग रेफर किया गया। समय पर की गई इस त्वरित कार्रवाई से छात्र की जान बच सकी। इस पूरे घटनाक्रम में अदाणी फाउंडेशन की इमरजेंसी एंबुलेंस की भूमिका निर्णायक साबित हुई।

उल्लेखनीय है कि अदाणी फाउंडेशन की ओर से गोंदुलपारा खनन परियोजना के तहत बड़कागांव प्रखंड में पिछले चार वर्षों से निःशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। यह सेवा क्षेत्र के सुदूर गांवों के लिए किसी जीवनरेखा से कम नहीं है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना एक बड़ी चुनौती होती है, जिसे अदाणी फाउंडेशन की इस पहल ने काफी हद तक दूर किया है।

आंकड़ों के मुताबिक, बीते चार वर्षों में इस एंबुलेंस सेवा के माध्यम से कुल 387 आपातकालीन मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। इनमें पिछले तीन महीनों में 25 मरीजों को हजारीबाग और 3 मरीजों को रांची रेफर किया गया। एंबुलेंस सेवा से जिन मामलों में लोगों की जान बची, उनमें सांप काटने, छत से गिरने, बिजली के करंट लगने, पेड़ से गिरने, प्रसव के मामले सहित अन्य गंभीर आपात स्थितियां शामिल हैं।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अदाणी फाउंडेशन की यह निःशुल्क एंबुलेंस सेवा खासकर गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है। समय पर अस्पताल पहुंचने से न केवल जान बची, बल्कि इलाज का खर्च और मानसिक तनाव भी कम हुआ।

गौरतलब है कि गोंदुलपारा खनन परियोजना क्षेत्र में अदाणी फाउंडेशन केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा, कौशल विकास, पेयजल, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में भी लगातार कार्य कर रही है। स्कूलों के सहयोग, युवाओं के प्रशिक्षण, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन और बुनियादी सुविधाओं के विकास के माध्यम से फाउंडेशन ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में प्रयासरत है।

बड़कागांव प्रखंड में अदाणी फाउंडेशन की यह निःशुल्क एंबुलेंस सेवा आज न केवल एक वाहन, बल्कि संकट की घड़ी में लोगों के लिए जीवनरक्षक साधन बन चुकी है। जो कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की एक सशक्त और मानवीय मिसाल पेश करती है।

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(Udaipur Kiran) / विकाश कुमार पांडे

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