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Wednesday, 28 October 2026
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बंगाल फर्जी पासपोर्ट केस : ईडी सात पाकिस्तानी नागरिकों की तलाश में, भारतीय पासपोर्ट हासिल करने का आरोप

फर्जी पासपोर्ट - प्रतिकात्मक फोटो

कोलकाता, 20 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) । पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब सात संदिग्ध पाकिस्तानी नागरिकों का पता लगाने में जुटी है, जिन्होंने कथित तौर पर इस गिरोह के जरिये भारतीय पासपोर्ट हासिल किए थे।

ईडी अधिकारियों के अनुसार, इन पासपोर्टों की व्यवस्था इंदु भूषण हालदार नामक तकनीकी विशेषज्ञ ने की थी, जो इस सिंडिकेट का प्रमुख ऑपरेटर बताया जा रहा है। हालदार को बीते सप्ताह गिरफ्तार किया गया था।

जांचकर्ताओं ने पाया है कि हालदार का संपर्क एक पाकिस्तानी नागरिक आजाद मल्लिक से था, जो इन सात लोगों और हालदार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, इन सातों संदिग्धों ने भी मल्लिक की तरह ही प्रक्रिया अपनाई थी —पहले फर्जी बांग्लादेशी पहचान पत्र बनवाए, फिर जाली भारतीय दस्तावेजों के आधार पर भारतीय नागरिकता हासिल की। इसके बाद मल्लिक ने कोलकाता में किराए के मकान से हवाला कारोबार और फर्जी पासपोर्ट रैकेट चलाना शुरू किया।

ईडी को अब तक करीब 250 पासपोर्टों का ब्योरा मिला है, जिनमें इन सात पाकिस्तानी नागरिकों के पासपोर्ट भी शामिल हैं। बताया जा रहा है कि हालदार ने केवल मल्लिक की सिफारिश पर ही करीब दो करोड़ रुपये की अवैध कमाई की।

हालदार को पिछले सप्ताह नदिया जिले के चाकदाहा से गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है। वहीं, मल्लिक को इस साल अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था और वह भी न्यायिक हिरासत में है।

फर्जी पासपोर्ट रैकेट का खुलासा सबसे पहले पिछले साल पश्चिम बंगाल पुलिस ने किया था। तब से अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इसके बाद मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की जांच के लिए मामला ईडी को सौंपा गया।

अप्रैल में ईडी ने बड़ी सफलता हासिल की थी जब मल्लिक को गिरफ्तार कर पूछताछ में यह पता चला कि वह विदेश यात्रा के इच्छुक लोगों के लिए फर्जी वीजा की व्यवस्था भी करता था।

राज्य पुलिस ने अब तक इस मामले में 130 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें 120 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिए भी शामिल हैं। इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं।

(Udaipur Kiran) / ओम पराशर

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