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Thursday, 29 October 2026
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सत्ता के शिखर पर भाजपा का होना कल्याण सिंह की मेहनत का फल: केशव मौर्य

दीप जलाते केशव प्रसाद मौर्य व राजबीर सिंह

श्रीराम ने अपने काज के लिए स्वयं ही कल्याण सिंह को चुना: संदीप सिंह

लखनऊ, 15 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । रामभक्ति, राष्ट्रधर्म और सामाजिक स्वाभिमान की हुंकार के साथ अखिल भारतीय लोधी राजपूत कल्याण महासभा ने सोमवार को अपना प्रथम स्थापना दिवस मनाया। गोमतीनगर विस्तार स्थित सीएमएस सभागार से उठा यह स्वर केवल एक संगठन के एक वर्ष पूरे होने का उत्सव नहीं था, बल्कि यह उस वैचारिक धारा का उद्घोष था जिसने सत्ता को नहीं, सिद्धांत को चुना; कुर्सी को नहीं, श्रीराम को प्राथमिकता दी।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बेहद स्पष्ट और आक्रामक शब्दों में कहा कि अगर आज हम देश और प्रदेश में सत्ता के शिखर पर हैं, तो उसमें कल्याण सिंह बाबूजी का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि बाबूजी केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किए जाते हैं। उनके नाम के साथ त्याग, साहस और राष्ट्रधर्म स्वतः जुड़ जाता है। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 की ऐतिहासिक घटना का उल्लेख करते हुए दो टूक कहा कि लोग कुर्सी के लिए क्या-क्या नहीं करते, लेकिन अगर बाबूजी भी रामभक्तों को रोक देते, अगर उन्होंने कारसेवकों को मुलायम सिंह की तरह रोका होता, तो न ढांचा ढहता और न ही आज रामलला का भव्य मंदिर बनता।

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह संगठन पसीने और परिश्रम की ताकत से आगे बढ़ रहा है और गरीबों, वंचितों तथा अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति की लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बाबूजी गरीबी और भूख को भाषणों से नहीं, जीवन से जानते थे। यही कारण था कि जब प्रभु श्रीराम का प्रश्न आया तो उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को भी ठोकर मार दी। श्री पाठक ने कहा कि सत्ता से चिपके रहना सामान्य है, लेकिन सत्ता त्यागकर सिद्धांतों पर खड़ा होना असाधारण साहस है, और बाबूजी उसी साहस के प्रतीक थे।

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि बाबूजी कल्याण सिंह के आदर्शों और विचारों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। प्रभु श्रीराम की सेवा में मुख्यमंत्री पद त्यागने वाले बाबूजी का सपना आज राम मंदिर के पूर्ण निर्माण के रूप में साकार हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम उसी को चुनते हैं, जो उनके लिए समर्पित होता है और लोधी समाज के गरीब परिवार में जन्मे कल्याण सिंह इसी समर्पण का उदाहरण थे। मंत्री ने वीरांगना अवंतीबाई लोधी, अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी और स्वामी ब्रह्मानंद महाराज को स्मरण करते हुए कहा कि उनके विचार और सत्कर्म सदैव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा को पहला मुख्यमंत्री लोधी समाज ने दिया और बाबूजी सर्वसमाज के लिए स्वीकार्य नेता रहे, क्योंकि उन्होंने किसी वर्ग या जाति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का हित साधा।

पूर्व सांसद राजवीर सिंह ‘राजू भैया’ ने कहा कि जो संगठन अपने वर्चस्व के लिए चलते हैं, वे समाज को तोड़ते हैं, जबकि यह संगठन समाज को जोड़ने के लिए बना है। उन्होंने स्वामी ब्रह्मानंद जी महाराज के नाम पर विश्वविद्यालय की मांग को मजबूती से दोहराया।

सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि यदि कल्याण सिंह न होते तो राम मंदिर आंदोलन निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंचता। राम मंदिर का नाम आते ही हर हिंदू के मन में बाबूजी का चित्र उभर आता है, क्योंकि उन्होंने जो कहा, वही करके दिखाया।

(Udaipur Kiran) / बृजनंदन

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