उच्च न्यायालय ने रेप पीड़ितों के गर्भ खत्म करने में देरी पर खुद की जनहित याचिका कायम की

-13 जनवरी को होगी सुनवाई
प्रयागराज, 17 दिसंबर (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में रेप पीड़ितों के गर्भ खत्म करने के मामलों में सही कदम उठाने में अलग-अलग स्तर पर हो रही देरी के मुद्दे पर खुद ही एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) कायम किया है। इस मामले का नाम रखा गयाः प्रेग्नेंसी खत्म करने के मामलों में सभी सम्बंधित लोगों को जागरूक करने के लिए गाइडलाइंस बनाने के संबंध में जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश सितम्बर में जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता और जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने दिया था।
बेंच ने महसूस किया कि प्रक्रिया में होने वाली देरी को दूर करना ज़रूरी है, जो अक्सर यौन उत्पीड़न की घटनाओं की पीड़ितों के लिए समय पर चिकित्सीय मदद में रुकावट बनती है।
इस महत्वपूर्ण मामले में कोर्ट की मदद के लिए बेंच ने एडवोकेट महिमा मौर्य को एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) भी नियुक्त किया है। एमिक्स क्यूरी (न्याय मित्र) और राज्य की ओर से पेश हुए एडिशनल चीफ स्टैंडिंग काउंसिल राजीव गुप्ता ने अधिकारियों को जागरूक करने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी को है। उम्मीद है कि हाईकोर्ट दिए गए सुझावों पर आगे विचार करेगा ताकि प्रेग्नेंसी खत्म करने के मामलों में सभी सम्बंधित लोगों को जागरूक करने के लिए सही गाइडलाइंस बनाई जा सके।
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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे



