राजस्थान हाईकोर्ट : आरक्षित वर्ग अभ्यर्थी के ज्यादा अंक तो जनरल में चयन : नियुक्ति के आदेश

जोधपुर, 05 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने मेरिट माइग्रेशन के सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस फरजद अली ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित वर्ग का कोई उम्मीदवार बिना किसी छूट (जैसे आयु या योग्यता) का लाभ लिए सामान्य वर्ग के कट-ऑफ से ज्यादा अंक हासिल करता है, तो उसे सामान्य वर्ग में ही चयनित माना जाएगा। कोर्ट ने जोधपुर निवासी याचिकाकर्ता कीर्ति चौधरी की साल 2018 से लंबित याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें छह सप्ताह में जूनियर हाइड्रो जियोलॉजिस्ट पद पर नियुक्ति देने का आदेश दिया है।
मामला आरपीएससी की ओर से साल 2014 में विज्ञापित जूनियर हाइड्रो जियोलॉजिस्ट भर्ती से जुड़ा है, जिसका परिणाम 18 जनवरी 2018 को जारी हुआ था। याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि ओबीसी (महिला) वर्ग की अभ्यर्थी दीप्ति कलाल ने 61 अंक प्राप्त किए थे, जबकि सामान्य (महिला) वर्ग की कट-ऑफ 58 अंक थी। इसके बावजूद आरपीएससी ने दीप्ति कलाल को ओबीसी वर्ग में ही चयनित माना। वकील ने तर्क दिया कि चूंकि दीप्ति ने फीस के अलावा किसी अन्य छूट का लाभ नहीं लिया और उनके अंक जनरल कट-ऑफ से ज्यादा हैं, इसलिए उन्हें जनरल कैटेगरी में शिफ्ट किया जाना चाहिए था। यदि ऐसा होता, तो ओबीसी वर्ग की सीट खाली होती और वेटिंग लिस्ट में नंबर-1 पर मौजूद कीर्ति चौधरी (56 अंक) का चयन हो जाता।
आरपीएससी का तर्क- स्क्रीनिंग में कम नंबर थे
सुनवाई के दौरान आरपीएससी और सरकार की ओर से वकील ने 26 जुलाई 2017 के सर्कुलर का हवाला देते हुए याचिका का विरोध किया। सरकारी वकील ने तर्क दिया कि दीप्ति कलाल ने लिखित परीक्षा (स्क्रीनिंग टेस्ट) में जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से कम अंक प्राप्त किए थे, इसलिए उन्हें रिजर्व कैटेगरी में रखा गया, भले ही इंटरव्यू के बाद उनके फाइनल माक्र्स ज्यादा थे।
प्रशासनिक चूक से संवैधानिक हक नहीं छीन सकते
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि फाइनल मेरिट ही प्रासंगिक है। जब ओबीसी उम्मीदवार ने जनरल उम्मीदवार (58) से अधिक अंक (61) प्राप्त किए, तो उसे जनरल कैटेगरी में रखना उत्तरदाताओं का कर्तव्य था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रशासनिक चूक संवैधानिक समानता को पराजित नहीं कर सकती। कोर्ट ने माना कि वर्ष 2017 का सर्कुलर संवैधानिक सिद्धांतों और बाध्यकारी नजीरों से ऊपर नहीं हो सकता। कोर्ट ने आरपीएससी और भू-जल विभाग को निर्देश दिया कि परिणाम को संशोधित मानकर कीर्ति चौधरी को ओबीसी (महिला) वर्ग में नियुक्ति दी जाए। यह प्रक्रिया छह सप्ताह में पूरी करनी होगी। याचिकाकर्ता को बैक वेजेस (पुरानी तनख्वाह) नहीं मिलेगी, लेकिन उनकी वरिष्ठता उनके जूनियर की नियुक्ति की तारीख से ही मानी जाएगी।
(Udaipur Kiran) / सतीश



