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Wednesday, 28 October 2026
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2017 से पूर्व 16 से 18 साल उम्र की पत्नी के साथ सम्बंध आईपीसी के तहत दुष्कर्म नहीं : उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाईकाेर्ट

–2005 की घटना में विवाह के बाद बने शारीरिक सम्बंध को अपराध मानकर सुनाई गई सजा रद्द

प्रयागराज, 15 अक्टूबर (Udaipur Kiran News) । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आदेश में कहा कि वर्ष 2017 में उच्चतम न्यायालय के फैसले से पहले 16 से 18 साल उम्र की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बंध आईपीसी के तहत दुष्कर्म नहीं था। इसी के साथ कोर्ट ने 2005 की घटना में विवाह के बाद बने शारीरिक सम्बंध को अपराध मानकर सुनाई गई सजा और दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।

यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम ने कानपुर के इस्लाम उर्फ पलटू की अपील पर दिया है। अपीलार्थी के खिलाफ पीड़िता के पिता ने वर्ष 2005 में दुष्कर्म, अपहरण सहित कई आरोप में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप लगाया था कि आरोपी उसकी 16 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर भगा ले गया और दुष्कर्म किया।

आरोपित का कहना था कि वह लड़की मुस्लिम हैं और उन्होंने सहमति से निकाह किया था। ट्रायल कोर्ट ने पीड़िता को नाबालिग और उसकी सहमति को महत्वहीन मानते हुए अपीलार्थी को दुष्कर्म, अपहरण, विवाह के लिए मजबूर करने के इरादे से अपहरण का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

कोर्ट में अपीलार्थी के अधिवक्ता ने दलील दी कि चिकित्सा जांच रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की उम्र 16 वर्ष से अधिक थी। 18 वर्ष से अधिक नहीं थी। ऐसे मामलों में दो वर्ष अधिक या कम का अंतर माना जाता है। पीड़िता और अपीलार्थी मुस्लिम हैं और उन्होंने निकाह किया था। पीड़िता के बयान से स्पष्ट था कि शारीरिक सम्बंध विवाह के बाद बने थे। ऐसे में अपीलार्थी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट ने 2017 के इंडिपेंडेंट थॉट बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया। जिसके तहत 18 वर्ष से कम आयु की पत्नी के साथ यौन संबंध भी दुष्कर्म माना गया क्योंकि पूर्व की व्यवस्था यह पॉस्को एक्ट के प्रावधान से सुसंगत नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया था कि यह फैसला भविष्य के प्रभाव से लागू होगा इसलिए 2005 की घटना में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लागू नहीं होगा। इसी के साथ कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए अपीलार्थी को दुष्कर्म व अन्य आरोप से बरी कर दिया।

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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे

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