शिमला, 19 अगस्त (Udaipur Kiran). Himachal Pradesh में मॉनसून की तबाही लगातार जारी है. राजधानी शिमला सहित राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मंगलवार को भी जोरदार बारिश हुई. मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने 25 अगस्त तक भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. इस दौरान कई जिलों में गरज-चमक, अंधड़ और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है. 20 अगस्त को ऊना, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर में बिजली गिरने का अलर्ट है, जबकि 21 अगस्त को कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा. 22 और 23 अगस्त को उना, चंबा, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है.

बीते 24 घंटों में शिमला के जुब्बड़हट्टी में सबसे ज्यादा 70 मिमी बारिश दर्ज की गई. ऊना के अंब में 60, कुल्लू के भुंतर में 50, शिमला व बिलासपुर में 40-40 मिमी बारिश हुई. लगातार हो रही बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है और भूस्खलन के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह से बाधित हो गई है. मंगलवार शाम तक प्रदेश में एक नेशनल हाइवे और 356 सड़कें बंद रहीं, जिनमें मंडी जिले में 179, कुल्लू में 104, कांगड़ा में 21 और शिमला में 16 सड़कें शामिल हैं. कुल्लू जिले में एनएच-305 भी पूरी तरह से बंद है.
भारी बारिश के कारण बिजली और पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है. राज्यभर में 872 ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं, जिनमें से 597 सिर्फ कुल्लू में हैं. मंडी में 253 और अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में ट्रांसफार्मर ठप हैं. प्रदेश की 140 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हैं, जिनमें कुल्लू में 63, मंडी में 60 और कांगड़ा में 8 योजनाएं शामिल हैं.
आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, इस मानसून सीजन में अब तक 276 लोगों की मौत हो चुकी है, 37 लापता हैं और 336 लोग घायल हुए हैं. मंडी और कांगड़ा में सबसे ज्यादा 47-47 लोगों की मौत हुई है. प्रदेश में 2,679 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 621 पूरी तरह ढह गए. 376 दुकानें और 2,416 पशुशालाएं भी नष्ट हो गई हैं. अकेले मंडी जिले में 1,367 मकान, 299 दुकानें और 1,304 पशुशालाएं तबाह हुई हैं. बारिश और भूस्खलन से 1,797 पशुओं और 25,755 पोल्ट्री पक्षियों की मौत भी हो चुकी है. सरकारी आकलन के मुताबिक प्रदेश को अब तक 2,216 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.
राजधानी शिमला में Monday रात नवबहार से राजभवन की ओर रामचंद्रा चौक के पास भारी भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर मलबा और पेड़ गिरने से यातायात अवरुद्ध हो गया. तीन से चार सरकारी भवन भूस्खलन की चपेट में आ गए, जिनमें रह रहे 35 से 40 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया.
मंडी जिले के पद्दर उपमंडल की चौहारघाटी में भारी तबाही हुई है. शिल्हबुधाणी और तरस्वाण पंचायतों में छह फुट ब्रिज, एक वाहन, एक दुकान और सैकड़ों बीघा भूमि तेज बहाव में बह गई. कुल्लू जिले की लगघाटी में बादल फटने से दो दुकानों और एक बाइक को नुकसान पहुंचा है. प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं और कुल्लू-बंजार उपमंडल के सभी शिक्षण संस्थान मंगलवार को बंद रहे.