New Delhi, 20 अगस्त (Udaipur Kiran). आज के समय में क्रेडिट कार्ड का उपयोग तेजी से बढ़ा है. लोग ऑनलाइन शॉपिंग, यात्रा, होटल, रेस्टोरेंट और ईएमआई तक के भुगतान के लिए भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं. अगर आप सोचते हैं कि क्रेडिट कार्ड का लेन-देन केवल आपके और बैंक के बीच है, तो यह गलतफहमी दूर कर लें. आयकर विभाग अब आपके कार्ड खर्च पर भी नजर रख रहा है, खासकर तब, जब आपके बिल एक तय सीमा से ऊपर जाते हैं.

कब आता है टैक्स डिपार्टमेंट की नजर में?
आयकर विभाग ने क्रेडिट कार्ड से जुड़े कुछ नियम बनाए हैं. अगर कोई व्यक्ति साल में अपने क्रेडिट कार्ड से 2 लाख रुपये से ज्यादा खर्च करता है या किसी महीने में एक लाख रुपये से अधिक का बिल नकद में चुकाता है, तो इसकी जानकारी सीधे विभाग तक पहुंच जाती है. ऐसे मामलों में विभाग आपकी आय और खर्च के संतुलन को जांचता है. अगर आपके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में दी गई आमदनी और खर्च में बड़ा अंतर पाया जाता है, तो आपको नोटिस भेजा जा सकता है.
नोटिस मिलने पर क्या करें?
आयकर विभाग से नोटिस मिलना तुरंत जुर्माना लगने का संकेत नहीं है. इसका मतलब है कि आपको यह साबित करना होगा कि आपने इतनी रकम कहां से खर्च की. आपको यह स्पष्ट करना जरूरी है कि खर्च सैलरी से किया गया, सेविंग्स से निकाला गया या गिफ्ट के रूप में पैसा मिला. यदि संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो विभाग टैक्स और पेनल्टी दोनों लगा सकता है.
किन गलतियों से बचें?
क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान हमेशा डिजिटल माध्यम, जैसे UPI, नेट बैंकिंग या ऑनलाइन ट्रांसफर से करें. कैश पेमेंट से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प है. इसके अलावा, ITR फाइल करते समय अपनी आमदनी और प्रमुख खर्चों का सही ब्यौरा जरूर दें. अगर किसी साल में कोई बड़ी खरीदारी या निवेश किया है, तो उसके स्रोत को स्पष्ट तौर पर दिखाएं. इस तरह आप नोटिस की स्थिति से बच सकते हैं.