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Thursday, 29 October 2026
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अशोकनगर: अब न कोई महाराजा न राजा, लोकतंत्र में जनता हो जागरूक: लक्ष्मण सिंह

अशोकनगर: अब न कोई महाराजा न राजा, लोकतंत्र में जनता हो जागरूक: लक्ष्मण सिंह
अशोकनगर: अब न कोई महाराजा न राजा, लोकतंत्र में जनता हो जागरूक: लक्ष्मण सिंह

अशोकनगर, 13 दिसम्बर (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश के अशोकनगर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने शनिवार को अपनी यात्रा के बीच गांधी पार्क चौराहे पर संदेश देते हुए कहा कि अब कोई न महाराजा है न हम राजा हैं, लोकतंत्र में जनता को जागरूक होना चाहिए और अपनी आवाज उठाना चाहिए।

दरअसल पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह अपने पुत्र आदित्य विक्रम सिंह और पोते देवादित्य सिंह के साथ यहां सामाजिक समरसता रैली लेकर आए हुए थे। जहां उन्होंने लोगों की समस्यायें सुनी और अपना संदेश दिया। उनका कहना कि अब न हम राजा हैं और न कोई महाराजा, लोकतंत्र में जनता ही सब कुछ है, जनता को जागरूक होना चाहिए। संविधान की मजबूती से लोकतंत्र मजबूत होता है लोगों को आगे आकर बोलना चाहिए, निडर होकर अपना हक मांगना चाहिए।

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रोजगार की समस्या देखने-सुनने में मिली, यहां रोजगार के साधन बडऩा चाहिए, हम जनप्रतिनिधि चुनते हैं उन्हें छोटे-छोटे रोजगारों को उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहनों को सरकार आप पर निर्भर नहीं बल्कि आत्मनिर्भर बनाए, रुपये के बदले में वोट लेना बंद होना चाहिए, अगर बहने आत्मनिर्भर होंगी तो 12 सौ रुपये क्या वे 12 हजार रुपये महीने कमायेंगी। इसी प्रकार उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि के नाम पर 500 रुपये किसानों को देकर ये खरीदी भी बंद होना चाहिए। जो शर्म की बात है।

उन्होंने नौकरशाही पर भी कटाक्ष कर कहा कि अधिकारी भी संविधान की शपथ से कार्य करें कोई महाराज, जनप्रतिनिधि के पीछे कदम ताल करने की जरूरत नहीं। लक्ष्मण सिंह ने कहा कि उन्होंने सामाजिक समरसता कि ये यात्रा 5 नम्बर से राधौगढ़ से शुरू की थी, वह गुना जिले की विधानसभाओं से होते हुए अशोकनगर जिले में उनकी यात्रा जारी है, उनका कहना कि वह पूरे प्रदेश की विधानसभाओं में पहुंचकर यात्रा पूरी करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि अब तक वे 11 चुनाव लड़ चुके हैं, आगामी अब कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे, बस प्रदेश भर में लोकतंत्र की मजबूती के लिए लोगों को जागरूक करने का कार्य करेंगे।

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(Udaipur Kiran) / देवेन्द्र ताम्रकार

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