छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल की याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

पूर्व Chief Minister  भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल

बिलासपुर, 8 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Chhattisgarh के चर्चित शराब घोटाले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग कार्रवाई के बीच पूर्व Chief Minister भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की याचिका पर आज साेमवार काे उच्च न्यायालय में चली विस्तृत बहस आखिरकार समाप्त हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखते हुए आदेश आने के संकेत दिए हैं. माना जा रहा है कि हाईकोर्ट किसी भी समय अपना निर्णय सुना सकता है, जिसकी वजह से राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ गई है.

शराब घोटाले से उपजे मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण में गिरफ्तार चैतन्य बघेल बीते 18 जुलाई से रायपुर सेंट्रल जेल में निरुद्ध हैं. उनकी ओर से दाखिल याचिका में ईडी की गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताते हुए राहत की मांग की गई थी. दूसरी ओर एजेंसी ने अदालत में कई दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उनके खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप दोहराया.

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की सिंगल बेंच जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा के समक्ष हुई. अदालत द्वारा फैसला सुरक्षित किए जाने के बाद प्रशासनिक तंत्र से लेकर राजनीतिक दलों में अटकलों का दौर तेज है.

ईडी का आरोप है कि, कथित शराब घोटाले से निकले करोड़ों रुपये की धनराशि को जटिल लेयरिंग के जरिए चैतन्य बघेल तक पहुंचाया गया और बाद में इसे रियल एस्टेट कारोबार में डाल दिया गया. एजेंसी के मुताबिक करीब 16.70 करोड़ रुपये चैतन्य से जुड़े प्रोजेक्ट्स में लगाए गए.

जांच में सामने आया कि ‘विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स)’ के खर्च और वास्तविक निवेश में भारी विसंगतियां हैं. ईडी ने छापेमारी के दौरान कई रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा जब्त किए थे, जिसमें एक ठेकेदार को कथित तौर पर 4.2 करोड़ रुपये नकद भुगतान किए जाने की जानकारी दर्ज है, जबकि आधिकारिक कागजों में यह भुगतान नहीं दिखाया गया.प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेंद्र जैन के बयान में दावा किया गया कि, निर्माण पर वास्तविक लागत 13 से 15 करोड़ रुपये आई, जबकि पेपरवर्क में सिर्फ 7.14 करोड़ रुपये दर्शाए गए हैं.

ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने अदालत में कहा कि, घोटाले से जुड़े लेनदेन की जांच में 1000 करोड़ रुपये तक की संदिग्ध ट्रांजैक्शन चिह्नित हुई हैं. पप्पू बंसल सहित कई लोगों के बयान, चैट और फोन रिकॉर्डिंग में ऐसे नेटवर्क का उल्लेख है जिसके जरिए कथित अवैध धनराशि अनवर ढेबर, दीपेंद्र चावड़ा, के.के. श्रीवास्तव, कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और अंततः चैतन्य बघेल तक पहुंचाई गई.

चैतन्य बघेल की ओर से पेश वकील फैजल रिजवी का कहना था कि, पूरी गिरफ्तारी एकतरफा कार्रवाई पर आधारित है. उनके अनुसार पप्पू बंसल के बयान पर ही ईडी ने चैतन्य को आरोपी बनाया, जबकि बंसल स्वयं एनबीडब्ल्यू के बावजूद खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे इस बयान की विश्वसनीयता संदिग्ध हो जाती है.रिजवी ने यह भी कहा कि, जांच 2022 से जारी है, लेकिन चैतन्य बघेल को एक भी समन जारी नहीं किया गया. मार्च में उनके घर पर छापे के दौरान डिजिटल डिवाइस और कागजात जब्त कर लिए गए थे, और मांगे गए सभी दस्तावेज समय पर उपलब्ध करा दिए गए. इसके बावजूद न तो उनका बयान दर्ज किया गया, न पूछताछ के लिए बुलाया गया. सीधे गिरफ्तारी कर ली गई.

बचाव पक्ष के मुताबिक, ईडी की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है और चैतन्य को सिर्फ इसलिए टारगेट किया गया क्योंकि वह पूर्व Chief Minister का बेटा हैं.

उल्लेखनीय है कि, Chhattisgarh शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चैतन्य बघेल की याचिका पर हाईकोर्ट में दोनों पक्षों की व्यापक दलीलें सामने आने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. ईडी जहां विशाल वित्तीय लेयरिंग, करोड़ों की नकद लेनदेन और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में अवैध निवेश का दावा कर रही है, वहीं बचाव पक्ष इसे बिना समन, बिना बयान और दबाव में दिए गए बयानों पर आधारित कार्रवाई बताते हुए गैरकानूनी गिरफ्तारी का आरोप लगा रहा है. अब उच्च न्यायालय का फैसला इस पूरे प्रकरण के भविष्य की दिशा तय करेगा और इसी वजह से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में फैसले को लेकर उत्सुकता व हलचल लगातार बनी हुई है.

(Udaipur Kiran) / विष्णु पांडेय

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