
18 साल से बंद है चीनी मिल अगले वर्ष 2026 में चालू होने की उम्मीद
सीतापुर, 10 दिसंबर (Udaipur Kiran) . Uttar Pradesh के जनपद सीतापुर में लगभग 18 वर्षों से बंद पड़ी कमलापुर चीनी मिल के पुनः संचालन की सुगबुगाहट व तैयारियों के बीच Indian चीनी मिल मजदूर संघ, कमलापुर ने मिल प्रशासन को 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपते हुए पुराने कर्मचारियों का बकाया वेतन और पीएफ व अन्य भत्ते दिलाए जाने की मांग की.
नए मालिक चड्डा ग्रुप की एन.आर. इंफाकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा मिल संचालन की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद मजदूरों में उम्मीद जगी है. इसी क्रम में यूनियन अध्यक्ष अरुण तिवारी की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज महाप्रबंधक से मुलाकात करने पहुंचा. मिल के जीएम प्रदीप कुमार सलार के मुख्यालय से बाहर होने के कारण प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात उनके प्रतिनिधि जीएम कैन अजीत सिंह से हुई. यूनियन ने ज्ञापन सौंपकर बताया कि वर्ष 2008-09 में मिल बिना किसी ले-ऑफ नोटिस या क्लोजर परमिशन के अचानक बंद कर दी गई थी.
इसके चलते लगभग 350 कर्मचारी सड़क पर आ गए और वर्षों तक भुखमरी की स्थिति झेलते रहे. कर्मचारियों का संगठन बार-बार प्रबंधन से वार्ता व भुगतान की मांग करता रहा, पर समाधान नहीं मिला. अब जबकि मिल संचालन बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है ताे सभी कर्मचारियों को अविलंब ज्वाइनिंग दी जाए. साथ ही वर्षों से लंबित वेतन व पीएफ सहित सभी बकाया भुगतान किए जाएं. इस पर जीएम कैन अजीत सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपकी सारी बातें मालिक तक पूरी गंभीरता से पहुंचाई जाएंगी और एक सप्ताह के भीतर आपको स्पष्ट जवाब दे दिया जाएगा.
यूनियन ने मिल संचालन में पूरा सहयोग देने का आश्वासन भी दिया और औद्योगिक शांति बनाए रखने पर जोर दिया. यूनियन ने ज्ञापन की प्रतिलिपि Chief Minister , श्रम मंत्री, मुख्य सचिव, श्रम विभाग, आयुक्त, जिलाधिकारी व Superintendent of Police आदि अधिकारियों को भेजी है.
18 साल बाद जगी किसानों में आस
मैग्ना ग्रुप की यह चीनी मिल कमलापुर इलाके में मात्र तीन-चार वर्षो में ही चलने के बाद बंद हो गई थी . अब लगभग 18 वर्षों बाद कमलापुर चीनी मिल के चलने के आसार दिख रहे हैं. इस सम्बन्ध में Indian चीनी मिल संघ के अध्यक्ष अरुण तिवारी ने बताया कि यह मजदूरों के लिए बहुत खुशी की बात है. लेकिन नए मिल मालिक को पुराने कर्मचारियों को काम पर वापस बुलाना होगा और उनका पूरा बकाया भुगतान करना होगा. यदि प्रबंधन ऐसा नहीं करता है तो मजदूर संघर्ष के लिए तैयार हैं.
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(Udaipur Kiran) / Mahesh Sharma
