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Thursday, 29 October 2026
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जेल में रहते हुए नोबेल पुरस्कार पाने वाले मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियाल्यात्स्की बेलारूस में रिहा

मानवाधिकार कार्यकर्ता एलेस बियाल्यात्स्की (फाइल फोटो)

मिंस्क, 13 दिसंबर (Udaipur Kiran) । बेलारूस के प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता एलेस बियाल्यात्स्की को शनिवार को जेल से रिहा कर दिया गया। उनके साथ कुल 122 अन्य कैदियों को भी स्वतंत्र किया गया। यह कदम बेलारूस सरकार और अमेरिका के बीच हुई कूटनीतिक बातचीत के बाद उठाया गया है, जिसे पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।

63 वर्षीय बियाल्यात्स्की वर्षों से बेलारूस में राजनीतिक बंदियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ते रहे हैं। उन्हें वर्ष 2022 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, लेकिन उस समय वे जेल में बंद थे। उनकी रिहाई को राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा अमेरिका के साथ संवाद बढ़ाने और आर्थिक प्रतिबंधों में ढील की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

एलेस बियाल्यात्स्की को वर्ष 2021 में उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब राष्ट्रपति चुनाव के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। विपक्ष ने चुनाव परिणामों को विवादित बताया था। कई असंतुष्ट नेताओं ने देश छोड़ दिया, लेकिन बियाल्यात्स्की ने अपने सहयोगियों के साथ खड़े रहने का फैसला किया और बेलारूस में ही बने रहे।

अप्रैल 2023 में एक अदालत ने उन्हें वित्तीय अनियमितताओं और तस्करी से जुड़े आरोपों में 10 साल की सजा सुनाई थी। बियाल्यात्स्की ने इन आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए खारिज किया था। जेल में रहने के दौरान उनके स्वास्थ्य को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जाती रही।

बियाल्यात्स्की की पत्नी नतालिया पिंचुक ने पहले कहा था कि उनके पति जानते थे कि देश में रुकने का फैसला जोखिम भरा है, लेकिन उन्होंने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। नोबेल पुरस्कार समारोह में भी उनकी अनुपस्थिति ने वैश्विक मंच पर बेलारूस में मानवाधिकार स्थिति की ओर ध्यान खींचा था।

एलेस बियाल्यात्स्की का जन्म 25 सितंबर 1962 को हुआ था। उन्होंने साहित्य और शिक्षण से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में मानवाधिकार संगठन ‘वियासना’ की स्थापना की, जो राजनीतिक कैदियों और उनके परिवारों को कानूनी व मानवीय सहायता प्रदान करता है। वे इससे पहले भी कर चोरी के आरोपों में 2011 से 2014 तक जेल में रह चुके हैं।

उल्लेखनीय है कि बियाल्यात्स्की ऐसे गिने-चुने व्यक्तियों में शामिल हैं, जिन्हें हिरासत में रहते हुए नोबेल शांति पुरस्कार मिला। इससे पहले यह सम्मान जर्मनी के कार्ल वॉन ओसिएत्स्की, चीन के लियू शियाओबो और म्यांमार की आंग सान सू की को इसी स्थिति में मिला था।

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(Udaipur Kiran) / आकाश कुमार राय

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